ता हु॑वे॒ ययो॑रि॒दं प॒प्ने विश्वं॑ पु॒रा कृ॒तम्। इ॒न्द्रा॒ग्नी न म॑र्धतः ॥४॥
tā huve yayor idam papne viśvam purā kṛtam | indrāgnī na mardhataḥ ||
ता। हु॒वे॒। ययोः॑। इ॒दम्। प॒प्ने। विश्व॑म्। पु॒रा। कृ॒तम्। इ॒न्द्रा॒ग्नी इति॑। न। म॒र्ध॒तः॒ ॥४॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
मनुष्यों को चाहिये कि वायु और बिजुली को यथावत् जानें, इस विषय को कहते हैं ॥
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
स्तुति के योग्य 'इन्द्र और अग्नि'
स्वामी दयानन्द सरस्वती
मनुष्यैर्वायुविद्युतौ यथावद्विज्ञातव्यावित्याह ॥
ययोरिदं विश्वं पप्ने याविन्द्राग्नी पुरा कृतमिदं विश्वं न मर्धतस्ताऽहं हुवे ॥४॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
Men should know the air and electricity thoroughly—is told.
I praise those air and electricity on account of which, this world is going on, with all its dealings and which do not destroy the universe.
