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आ रि॑ख किकि॒रा कृ॑णु पणी॒नां हृद॑या कवे। अथे॑म॒स्मभ्यं॑ रन्धय ॥७॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

ā rikha kikirā kṛṇu paṇīnāṁ hṛdayā kave | athem asmabhyaṁ randhaya ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

आ। रि॒ख॒। कि॒कि॒रा। कृ॒णु॒। प॒णी॒नाम्। हृद॑या। क॒वे॒। अथ॑। ई॒म्। अ॒स्मभ्य॑म्। र॒न्ध॒य॒ ॥७॥

ऋग्वेद » मण्डल:6» सूक्त:53» मन्त्र:7 | अष्टक:4» अध्याय:8» वर्ग:18» मन्त्र:2 | मण्डल:6» अनुवाक:5» मन्त्र:7


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स्वामी दयानन्द सरस्वती

फिर राजा क्या करे, इस विषय को कहते हैं ॥

पदार्थान्वयभाषाः - हे (कवे) विद्वन् ! आप (पणीनाम्) व्यवहार करनेवालों के (किकिरा) व्यवस्थापत्रों को (आ, रिख) सब ओर से लिखो तथा दुष्टों के (हृदया) हृदयों को (रन्धय) अति पीड़ा देओ (अथ) इसके अनन्तर (अस्मभ्यम्) हम लोगों के लिये (ईम्) सुख (कृणु) करो ॥७॥
भावार्थभाषाः - राजा वादी और प्रतिवादी अर्थात् झगड़ालु प्रतिझगड़ालूओं का लिखापढ़ी पूर्वक न्याय करे ॥७॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

किकिरा कृणु

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (कवे) = क्रान्तप्रज्ञ विद्वन्! तू इस प्रकार ज्ञानोपदेश कर कि (पणीनाम्) = इन धनलुब्ध वणिजों के (हृदया) = हृदयों को (आरिख) = अवदारित कर दे। (किकिरा कृणु) = [कीर्णानि प्रशिथिलानि] इनके हृदयों को अवकीर्ण, प्रशिथिल व मृदु कर दे। [२] (अथ) = अब (ईम्) = निश्चय से इनके हृदयों को (अस्मभ्यम्) = हमारे लिये (रन्धय) = वशीभूत करिये ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- कवि के ज्ञानोपदेश से इन कृपणों के हृदय भी एक बार दहल जाएँ और वे भी दानवृत्ति की ओर झुक जायें ।
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स्वामी दयानन्द सरस्वती

पुना राजा किं कुर्य्यादित्याह ॥

अन्वय:

हे कवे ! त्वं पणीनां किकिराऽऽरिख दुष्टानां हृदया रन्धयाऽथाऽस्मभ्यमीं कृणु ॥७॥

पदार्थान्वयभाषाः - (आ) समन्तात् (रिख) लिख (किकिरा) व्यवस्थापत्राणि (कृणु) (पणीनाम्) व्यवहर्तॄणाम् (हृदया) हृदयानि (कवे) विद्वन् (अथ) (ईम्) सुखम् (अस्मभ्यम्) (रन्धय) ताडय ॥७॥
भावार्थभाषाः - राजा वादिप्रतिवादिनां लेखपुरस्सरं न्यायं कुर्यात् ॥७॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O creative lord of vision and foresight, write out the balance sheet of life’s hagglers and bargainers, touch their hearts, let them mature all round and let us be happy.
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आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड

What should a king do-is further told.

अन्वय:

O highly learned person! write down the traders' documents. Give punishment to or pierce the hearts of the wicked persons (so as to create repentance in them) and bestow happiness upon us--the righteous men.

भावार्थभाषाः - A king should record and judge the case of the petitioners and respondents.
टिप्पणी: It shows clearly that the science of writing is mentioned in the Rigveda-admittedly the oldest book in the library of mankind.
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माता सविता जोशी

(यह अनुवाद स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के आधार पर किया गया है।)
भावार्थभाषाः - राजाने वादी व प्रतिवादींचा लिखित स्वरूपात न्याय करावा. ॥ ७ ॥