स म॑न्दस्वा॒ ह्यन्ध॑सो॒ राध॑से त॒न्वा॑ म॒हे। न स्तो॒तारं॑ नि॒दे क॑रः ॥२७॥
sa mandasvā hy andhaso rādhase tanvā mahe | na stotāraṁ nide karaḥ ||
सः। म॒न्द॒स्व॒। हि। अन्ध॑सः। राध॑से। त॒न्वा॑। म॒हे। न। स्तो॒तार॑म्। नि॒दे। क॒रः॒ ॥२७॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
फिर वह राजा कैसा होवे, इस विषय को कहते हैं ॥
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
न स्तोतारं निदे करः
स्वामी दयानन्द सरस्वती
पुनः स राजा कीदृग्भवेदित्याह ॥
हे विद्वन् ! हि त्वं तन्वा महे राधसेऽन्धसो मन्दस्वा निदे स्तोतारं न करस्तस्मात् स भवाञ्जनप्रियोऽस्ति ॥२७॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
How should a king be-is further told.
O enlightened person! enjoy delight or convey that delight to others with your body, for acquiring great wealth with food. Do not yield your admirer to reproach. Therefore you are popular among men.
