कु॒वित्स॑स्य॒ प्र हि व्र॒जं गोम॑न्तं दस्यु॒हा गम॑त्। शची॑भि॒रप॑ नो वरत् ॥२४॥
kuvitsasya pra hi vrajaṁ gomantaṁ dasyuhā gamat | śacībhir apa no varat ||
कु॒वित्ऽस॑स्य। प्र। हि। व्र॒जम्। गोऽम॑न्तम्। द॒स्यु॒ऽहा। गम॑त्। शची॑भिः। अप॑। नः॒। व॒र॒त् ॥२४॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
फिर वह राजा कैसा होवे, इस विषय को कहते हैं ॥
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
कुवित्स का गोमान् व्रज
स्वामी दयानन्द सरस्वती
पुनः स राजा कीदृग्भवेदित्याह ॥
यो दस्युहा राजा शचीभिः कुवित्सस्य गोमन्तं व्रजमप गमत्स हि नः प्र वरत् ॥२४॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
How should a king be-is told.
Let that king ! destroyer of the wicked thieves and robbers, who with his wisdom or actions goes to the path, where there are many cows of a liberal man, who distributes much, accept us.
