स हि विश्वा॑नि॒ पार्थि॑वाँ॒ एको॒ वसू॑नि॒ पत्य॑ते। गिर्व॑णस्तमो॒ अध्रि॑गुः ॥२०॥
sa hi viśvāni pārthivām̐ eko vasūni patyate | girvaṇastamo adhriguḥ ||
सः। हि। विश्वा॑नि। पार्थि॑वा। एकः॑। वसू॑नि। पत्य॑ते। गिर्व॑णःऽतमः। अध्रि॑ऽगुः ॥२०॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
फिर मनुष्यों को कैसा राजा करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
अध्रिगुः
स्वामी दयानन्द सरस्वती
पुनर्मनुष्यैः कीदृशो राजा कर्त्तव्य इत्याह ॥
हे मनुष्याः ! स ह्येको गिर्वणस्तमोऽध्रिगू राजा विश्वानि पार्थिवा वसूनि पत्यतेऽतोऽस्माभिः सत्कर्तव्योऽस्ति ॥२०॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
What sort of king should be elected by men-is further told.
O men ! he alone (being matchless ), is the best among those to be praised, is of true movement and is the lord of the good articles known on earth, is worthy of our praise.
