स रथे॑न र॒थीत॑मो॒ऽस्माके॑नाभि॒युग्व॑ना। जेषि॑ जिष्णो हि॒तं धन॑म् ॥१५॥
sa rathena rathītamo smākenābhiyugvanā | jeṣi jiṣṇo hitaṁ dhanam ||
सः। रथे॑न। र॒थिऽत॑मः। अ॒स्माके॑न। अ॒भि॒ऽयुग्व॑ना। जेषि॑। जि॒ष्णो॒ इति॑। हि॒तम्। धन॑म् ॥१५॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
फिर वह राजा किससे किसको जीते, इस विषय को कहते हैं ॥
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
'रथीतम' प्रभु
स्वामी दयानन्द सरस्वती
पुनः स राजा केन किं जयेदित्याह ॥
हे जिष्णो ! स रथीतमस्त्वमभियुग्वनाऽस्माकेन रथेन हितं धनं जेषि तस्मात् प्रशंसनीयो भवसि ॥१५॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
Whom should a king, conquer and with what means-is told.
O conqueror ! being most skillful in those, who possess chariots, with our car which is harnessed and divided, you conquer abundant wealth. Therefore you are admirable.
