अभू॑रु वीर गिर्वणो म॒हाँ इ॑न्द्र॒ धने॑ हि॒ते। भरे॑ वितन्त॒साय्यः॑ ॥१॥
abhūr u vīra girvaṇo mahām̐ indra dhane hite | bhare vitantasāyyaḥ ||
अभूः॑। ऊँ॒ इति॑। वी॒र॒। गि॒र्व॒णः॒। म॒हान्। इ॒न्द्र॒। धने॑। हि॒ते। भरे॑। वि॒त॒न्त॒साय्यः॑ ॥१३॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
फिर वह राजा क्या करे, इस विषय को कहते हैं ॥
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
भरे वितन्तसाय्यः
स्वामी दयानन्द सरस्वती
पुनः स राजा किं कुर्य्यादित्याह ॥
हे गिर्वणो वीरेन्द्र ! त्वं महान् वितन्तसाय्यः सन् हिते धन उ भरे विजेताऽभूः ॥१३॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
What should a king do again-is told.
O king! you who are requested through good words and are a hero, you by nature being a great conqueror; be the victor in the battle for beneficent wealth.
