कस्मा॑ अ॒द्य सुजा॑ताय रा॒तह॑व्याय॒ प्र य॑युः। ए॒ना यामे॑न म॒रुतः॑ ॥१२॥
kasmā adya sujātāya rātahavyāya pra yayuḥ | enā yāmena marutaḥ ||
कस्मै॑। अ॒द्य। सुऽजा॑ताय। रा॒तह॑व्याय। प्र। य॒युः॒। ए॒ना। यामे॑न। म॒रुतः॑ ॥१२॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
फिर मनुष्यों को क्या करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
आनन्दमय-उत्तम प्रादुर्भाववाला-त्यागमय जीवन
स्वामी दयानन्द सरस्वती
पुनर्मनुष्यैः किं कर्त्तव्यमित्याह ॥
ये मरुतोऽद्यैना यामेन कस्मै सुजाताय रातहव्याय प्र ययुस्ते विद्यादातारो भूत्वा प्रशंसिता जायन्ते ॥१२॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
What should man do is told.
To whom the persons renowned on account of profound knowledge and givers of desirable things have gone with these thoughtful persons in peaceful mind? Being the givers of knowledge, such persons become admirable everywhere.
