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तं वः॒ शर्धं॒ रथा॑नां त्वे॒षं ग॒णं मारु॑तं॒ नव्य॑सीनाम्। अनु॒ प्र य॑न्ति वृ॒ष्टयः॑ ॥१०॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

taṁ vaḥ śardhaṁ rathānāṁ tveṣaṁ gaṇam mārutaṁ navyasīnām | anu pra yanti vṛṣṭayaḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

तम्। वः॒। शर्ध॑म्। रथा॑नाम्। त्वे॒षम्। ग॒णम्। मारु॑तम्। नव्य॑सीनाम्। अनु॑। प्र। य॒न्ति॒। वृ॒ष्टयः॑ ॥१०॥

ऋग्वेद » मण्डल:5» सूक्त:53» मन्त्र:10 | अष्टक:4» अध्याय:3» वर्ग:12» मन्त्र:5 | मण्डल:5» अनुवाक:4» मन्त्र:10


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स्वामी दयानन्द सरस्वती

फिर विद्वान् जन को मनुष्यों के अर्थ क्या इच्छा करनी चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥

पदार्थान्वयभाषाः - हे मनुष्यो ! जिस (रथानाम्) वाहनों और (नव्यसीनाम्) नवीनाओं के बीच (मारुतम्) मनुष्यों के सम्बन्धी (गणम्) समूह का और (त्वेषम्) सद्गुणों के प्रकाश का उपदेश करता हूँ और जिसको (वृष्टयः) वर्षायें (अनु, प्र, यन्ति) प्राप्त होती हैं (तम्) उस (शर्धम्) बल को (वः) आप लोगों के लिये प्राप्त करता हूँ ॥१०॥
भावार्थभाषाः - जो विद्वानों की नवीन-नवीन नीति को प्राप्त होते हैं, वे बल को प्राप्त होते हैं ॥१०॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

'स्वास्थ्य और इन्द्रिय दीप्ति' से प्राप्य आनन्द

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे प्राणो ! (वः) = आपके (नव्यसीनाम्) = स्तुति के योग्य [नु स्तुतौ] (रथानाम्) = शरीर-रथों के (तं मारुतं शर्धम्) = उस प्राण सम्बन्धी बल को तथा (त्वेषं गणम्) = दीप्त इन्द्रिय समूह को (अनु) = लक्ष्य करके, अर्थात् उसके अनुसार (वृष्टयः) = आनन्द की वर्षाएँ (प्रयन्ति) = प्रकर्षेण प्राप्त होती हैं। [२] प्राणसाधना से शरीर-रथ सबल व दृढ़ बनता है तथा इन्द्रिय समूह खूब दीप्त होता है। ऐसी स्थिति में ही आनन्द की प्राप्ति होती है ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ– प्राणसाधना से हमारा शरीर शक्ति सम्पन्न हो, इन्द्रियाँ दीप्त हों। तभी आनन्द होगा ।
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स्वामी दयानन्द सरस्वती

पुनर्विदुषा मनुष्यार्थं किमेष्टव्यमित्याह ॥

अन्वय:

हे मनुष्या ! यं रथानां नव्यसीनां मारुतं गणं त्वेषमुपदिशामि यं वृष्टयोऽनु प्र यन्ति तं शर्धं वः प्रापयामि ॥१०॥

पदार्थान्वयभाषाः - (तम्) (वः) युष्मभ्यम् (शर्धम्) बलम् (रथानाम्) यानानाम् (त्वेषम्) सद्गुणप्रकाशम् (गणम्) (मारुतम्) मरुतां मनुष्याणामिदम् (नव्यसीनाम्) नवीनानाम् (अनु) (प्र) (यन्ति) प्राप्नुवन्ति (वृष्टयः) ॥१०॥
भावार्थभाषाः - ये विदुषां नवीनां नवीनां नीतिं प्राप्नुवन्ति ते बलं लभन्ते ॥१०॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O people of the earth, the showers of peace, comfort and well being rain down on you in response to your strength, the speed and shine of your war-like chariots, the joint power and performance of your leaders, and the latest powers and policies you work out and follow for your peace and progress.
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आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड

A learned person's desire is told.

अन्वय:

O men! I convey or lead you to that strength of the lord of the Maruts heroic men who are masters of new chariots, and I tell you about their light of good virtues. They are followed by the rains (abundance. Ed.) of happiness and joy.

भावार्थभाषाः - Those persons become more mighty, who attain new policy adopted by the enlightened persons.
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माता सविता जोशी

(यह अनुवाद स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के आधार पर किया गया है।)
भावार्थभाषाः - जे विद्वानांची नवी नवी नीती अनुसरतात त्यांना बल प्राप्त होते. ॥ १० ॥