वांछित मन्त्र चुनें
530 बार पढ़ा गया

इळा॒ सर॑स्वती म॒ही ति॒स्रो दे॒वीर्म॑यो॒भुवः॑। ब॒र्हिः सी॑दन्त्व॒स्रिधः॑ ॥८॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

iḻā sarasvatī mahī tisro devīr mayobhuvaḥ | barhiḥ sīdantv asridhaḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

इळा॑। सर॑स्वती। म॒ही। ति॒स्रः। दे॒वीः। म॒यः॒ऽभुवः॑। ब॒र्हिः। सी॒द॒न्तुः॒। अ॒स्रिधः॑ ॥८॥

530 बार पढ़ा गया
ऋग्वेद » मण्डल:5» सूक्त:5» मन्त्र:8 | अष्टक:3» अध्याय:8» वर्ग:21» मन्त्र:3 | मण्डल:5» अनुवाक:1» मन्त्र:8


स्वामी दयानन्द सरस्वती

फिर उसी विषय को कहते हैं ॥

पदार्थान्वयभाषाः - हे मनुष्यो ! जैसे (अस्रिधः) नहीं नाश करनेवाली (इळा) प्रशंसित विद्या (सरस्वती) वाणी (मही) भूमि (मयोभुवः) सुख को करानेवाली (तिस्रः) तीन (देवीः) श्रेष्ठ गुणवती (बर्हिः) उत्तम गृहाश्रम को (सीदन्तु) प्राप्त हों, वैसे ही आप लोग भी प्राप्त होओ ॥८॥
भावार्थभाषाः - हे स्त्री और पुरुषो ! आप लोग विद्या उत्तम प्रकार शिक्षित वाणी और भूमि के राज्य को सुख के लिये प्राप्त हूजिये ॥८॥

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

इडा, सरस्वती, मही

पदार्थान्वयभाषाः - [१] पृथिवी स्थानीय अग्नि की पत्नी 'इडा' है, अन्तरिक्ष स्थानीय सरस्वान् [वायु] की पत्नी सरस्वती है, द्युस्थान आदित्य [भरत] की पत्नी 'मही' है। शरीर के साथ 'इडा' का सम्बन्ध है, शरीर में उचित अग्नि आवश्यक ही है। हृदयान्तरिक्ष के साथ 'सरस्वती' का सम्बन्ध है, सरस्वती का आराधक हृदय ही 'हृदय' है । मस्तिष्क आदित्य पत्नी मही का निवास स्थान है। यह मही ज्ञानवाणी ही मस्तिष्क को सुभूषित करती है। ये 'इडा सरस्वती मही' - शरीर, हृदय व मस्तिष्क की देवताएँ (तिस्रः) = तीनों मिलकर (देवी:) = हमारे जीवन को प्रकाशमय बनाती हैं (मयोभुवः) = ये कल्याण व नीरोगता को जन्म देनेवाली हैं। [२] (आस्त्रिधः) = किसी प्रकार का हिंसन न करती हुईं ये (बर्हिः) = हमारे वासनाशून्य हृदय में (सीदन्तु) = स्थित हों। हमारे हृदयों में इन तीनों के लिये स्थान हो। इन तीनों की स्थिति हमें अहिंसित बनाये। = भावार्थ- हम जीवन में 'इडा, सरस्वती व मही' के उपासक बनकर कल्याण को प्राप्त करें।

स्वामी दयानन्द सरस्वती

पुनस्तमेव विषयमाह ॥

अन्वय:

हे मनुष्या ! यथाऽस्रिध इळा सरस्वती मही मयोभुवस्तिस्रो देवीर्बर्हिः सीदन्तु तथैव यूयमपि सीदत ॥८॥

पदार्थान्वयभाषाः - (इळा) प्रशंसिता विद्या (सरस्वती) वाक् (मही) भूमिः (तिस्रः) (देवीः) दिव्यगुणाः (मयोभुवः) सुखं भावुकाः (बर्हिः) उत्तमं गृहाश्रमम् (सीदन्तु) प्राप्नुवन्तु (अस्रिधः) अहिंस्राः ॥८॥
भावार्थभाषाः - हे स्त्रीपुरुषा ! यूयं विद्यां सुशिक्षितां वाचं भूमिराज्यं च सुखाय प्राप्नुत ॥८॥

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Ila, divine knowledge of infinite omniscience, Sarasvati, divine language of existencial knowledge, and the divine spirit of mother earth, three divine givers of material, mental and spiritual bliss, may, we pray, come and sanctify our holy grass on the vedi and bless our yajna without delay and without fail.

आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड

The duties of a ruler are further dealt.

अन्वय:

O men! the non-violent admirable knowledge, noble speech and good land which are endowed with divine virtues and lead to happiness by having attained and leading the noble domestic life. So you should also be well-established there.

भावार्थभाषाः - O men and women! for your happiness you achieve knowledge, noble speech and kingdom of the land tracts.
टिप्पणी: इडा is from ईड-स्तुतौ, so it means admirable. Here it is used for admirable knowledge and is derived from. व्रिः- वृद्धौ।. It is used for Yajna and all great actions. Here it is used for great or good domestic life.

माता सविता जोशी

(यह अनुवाद स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के आधार पर किया गया है।)
भावार्थभाषाः - हे स्त्री-पुरुषांनो तुम्ही सुखासाठी विद्या, सुशिक्षित वाणी व भूमीचे राज्य प्राप्त करा ॥ ८ ॥