ई॒ळि॒तो अ॑ग्न॒ आ व॒हेन्द्रं॑ चि॒त्रमि॒ह प्रि॒यम्। सु॒खै रथे॑भिरू॒तये॑ ॥३॥
īḻito agna ā vahendraṁ citram iha priyam | sukhai rathebhir ūtaye ||
ई॒ळि॒तः। अ॒ग्ने॒। आ। व॒ह॒। इन्द्र॑म्। चि॒त्रम्। इ॒ह। प्रि॒यम्। सु॒ऽखैः। रथे॑भिः। ऊ॒तये॑ ॥३॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
अब राजविषय को कहते हैं ॥
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
'सुख' रथ
स्वामी दयानन्द सरस्वती
अथ राजविषयमाह ॥
हे अग्ने ! ईळितस्त्वमिह सुखै रथेभिरूतये चित्रं प्रियमिन्द्रमा वह ॥३॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
Here the duties of a king are mentioned.
O illumined soul ! being admired by us, bring in this world vehicles which are wonderful and bestow happiness, and dear prosperity in order to protect us.
