स नो॑ धी॒ती वरि॑ष्ठया॒ श्रेष्ठ॑या च सुम॒त्या। अग्ने॑ रा॒यो दि॑दीहि नः सुवृ॒क्तिभि॑र्वरेण्य ॥३॥
sa no dhītī variṣṭhayā śreṣṭhayā ca sumatyā | agne rāyo didīhi naḥ suvṛktibhir vareṇya ||
स। नः॒। धी॒ती। वरि॑ष्ठ॑या। श्रेष्ठ॑या। च॒। सु॒ऽम॒त्या। अग्ने॑। रा॒यः। दि॒दी॒हि॒। नः॒। सु॒वृ॒क्तिऽभिः॑। व॒रे॒ण्य॒ ॥३॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
अब अग्निसादृश्य से विद्वद्विषय को कहते हैं ॥
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
धनों द्वारा 'शुभकर्म, ज्ञानवर्धन, पापवर्जन' [धीति, सुमति, सुवृत्ति]
स्वामी दयानन्द सरस्वती
अथाग्निसादृश्येन विद्वद्विषयमाह ॥
हे वरेण्याग्ने ! स त्वं धीती वरिष्ठया श्रेष्ठया सुमत्या नो रायो दिदीहि सुवृक्तिभिश्च नः सततं वर्धय ॥३॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
The attributes of Agni (enlightened persons) are told.
O acceptable learned king ! you are purifier like the fire. Give us riches free from all evils along with the choicest, most excellent, the best and subtle intellect through the action.
