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या॒व॒यद्द्वे॑षसं त्वा चिकि॒त्वित्सू॑नृतावरि। प्रति॒ स्तोमै॑रुभूत्स्महि ॥४॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

yāvayaddveṣasaṁ tvā cikitvit sūnṛtāvari | prati stomair abhutsmahi ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

य॒वयत्ऽद्वे॑षसम्। त्वा॒। चि॒कि॒त्वित्। सू॒नृ॒ता॒ऽव॒रि॒। प्रति॑। स्तोमैः॑। अ॒भू॒त्स्म॒हि॒ ॥४॥

ऋग्वेद » मण्डल:4» सूक्त:52» मन्त्र:4 | अष्टक:3» अध्याय:8» वर्ग:3» मन्त्र:4 | मण्डल:4» अनुवाक:5» मन्त्र:4


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स्वामी दयानन्द सरस्वती

फिर स्त्री गुणों को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

पदार्थान्वयभाषाः - हे (चिकित्वित्) जनाने और (सूनृतावरि) सत्यवाणी का प्रकाश करनेवाली स्त्री ! हम लोग (स्तोमैः) प्रशंसाओं से (यावयद्द्वेषसम्) द्वेष करनेवाले को पृथक् करानेवाली (त्वा) तुझको (प्रति, अभूत्स्महि) जानें ॥४॥
भावार्थभाषाः - जो कभी द्वेष और द्वेष करनेवाले के सङ्ग को नहीं करती और सत्यवाणी और प्रशंसायुक्त है, वही स्त्री श्रेष्ठ है ॥४॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

'यावयद्वेषा' उषा

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (चिकित्वत्) = ज्ञान को प्राप्त करानेवाली, (सूनृतावरि) = प्रिय सत्यवाणियोंवाली उषा ! (त्वाम्) = तुझे (स्तोमैः) = स्तुतियों द्वारा प्(रति अभुत्स्महि) = प्रतिदिन प्रबुद्ध करते हैं। इस उषाकाल में हम स्वाध्याय द्वारा ज्ञान को बढ़ाते हैं [चिकित्वत्] शान्तचित्त होकर प्रिय सत्यवाणियों को बोलने का ही व्रत लेते हैं [सूनृतावरि] तथा प्रभु स्तवन करते हैं [स्तोमैः] । [२] उस उषाकाल का हम स्तवन करते हैं, जो कि (यावयद् द्वेषसम्) = हमारे से सब द्वेषों को दूर करनेवाला है। उषा के शान्त वातावरण में हम द्वेष आदि बुरी वासनाओं से आक्रान्त नहीं होते।
भावार्थभाषाः - भावार्थ– उषाकाल ज्ञान, प्रियसत्यवाणी, निद्वेष व प्रभुस्तवन के लिए है।
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स्वामी दयानन्द सरस्वती

पुनः स्त्रीगुणानाह ॥

अन्वय:

हे चिकित्वित् सूनृतावरि स्त्रि ! वयं स्तोमैर्यावयद्द्वेषसं त्वा प्रत्यभूत्स्महि ॥४॥

पदार्थान्वयभाषाः - (यावयद्द्वेषसम्) यावयन्तं द्वेष्टारं द्वेषसं द्वेष्टारं पृथक्कारयन्तीम् (त्वा) त्वाम् (चिकित्वित्) ज्ञापयन्तीम् (सूनृतावरि) सत्यवाक्प्रकाशिके (प्रति) (स्तोमैः) प्रशंसाभिः (अभूत्स्महि) विजानीयाम ॥४॥
भावार्थभाषाः - या कदाचिद् द्वेषं द्वेष्टृसङ्गन्न करोति सत्यवाक् प्रशंसिता वर्त्तते सैव स्त्री वरा ॥४॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O bright and illuminative dawn, spirit and beauty of truth and holiness, while you dispel hate and anger and inspire love and admiration, let us know and celebrate you with songs of praise and honour.
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आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड

The qualities of a good woman.

अन्वय:

O noble woman! you drive away all malicious or malevolent persons, and enlighten and illuminate true speech. May we know you well with words of praise.

भावार्थभाषाः - That woman alone is noble who does not have malice towards any one, nor has the company of malicious persons. She possesses admirable true speech.
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माता सविता जोशी

(यह अनुवाद स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के आधार पर किया गया है।)
भावार्थभाषाः - जी कधी द्वेष करीत नाही व द्वेष करणाऱ्यांची संगत धरत नाही. जिची वाणी सत्य व प्रशंसित असते तीच स्त्री श्रेष्ठ असते. ॥ ४ ॥