इन्द्रा॒बृह॒स्पती॑ व॒यं सु॒ते गी॒र्भिर्ह॑वामहे। अ॒स्य सोम॑स्य पी॒तये॑ ॥५॥
indrābṛhaspatī vayaṁ sute gīrbhir havāmahe | asya somasya pītaye ||
इन्द्रा॒बृह॒स्प॒ती॒ इति॑। व॒यम्। सु॒ते। गीः॒ऽभिः। ह॒वा॒म॒हे॒। अ॒स्य। सोम॑स्य। पी॒तये॑ ॥५॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
सोम का सम्पादन व रक्षण
स्वामी दयानन्द सरस्वती
पुनस्तमेव विषयमाह ॥
[हे] इन्द्राबृहस्पती ! यथा वयं गीर्भिरस्य सोमस्य पीतये युवां हवामहे तथा सुतेऽस्मानाह्वयत ॥५॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
The attributes of the State officials are described.
O teachers and preachers ! as we invite you with sweet words for drinking the juice of the nourishing herbs like soma, so you should also do when the Soma juice is effused.
