आ न॑ इन्द्राबृहस्पती गृ॒हमिन्द्र॑श्च गच्छतम्। सो॒म॒पा सोम॑पीतये ॥३॥
ā na indrābṛhaspatī gṛham indraś ca gacchatam | somapā somapītaye ||
आ। नः॒। इ॒न्द्रा॒बृ॒ह॒स्प॒ती॒ इति॑। गृ॒हम्। इन्द्रः॑। च॒। ग॒च्छ॒त॒म्। सो॒म॒ऽपा। सोम॑ऽपीतये ॥३॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
इन्द्र और बृहस्पति
स्वामी दयानन्द सरस्वती
पुनस्तमेव विषयमाह ॥
हे सोमपा इन्द्राबृहस्पती ! युवां नो गृहं सोमपीतये आ गच्छतमिन्द्रश्चागच्छेत् ॥३॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
The officials' duties are mentioned.
O king and teacher ! you are drinkers of Soma juice. Come to our home for drinking the Soma juice. Let also a wealthy man come along with you.
