व॒यमि॑न्द्र॒ त्वे सचा॑ व॒यं त्वा॒भि नो॑नुमः। अ॒स्माँअ॑स्माँ॒ इदुद॑व ॥४॥
vayam indra tve sacā vayaṁ tvābhi nonumaḥ | asmām̐-asmām̐ id ud ava ||
व॒यम्। इ॒न्द्र॒। त्वे। इति॑। सचा॑। व॒यम्। त्वा॒। अ॒भि। नो॒नु॒मः॒। अ॒स्मान्ऽअ॑स्मान्। इत्। उत्। अ॒व॒ ॥४॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
प्रभु के साथ मिलकर
स्वामी दयानन्द सरस्वती
पुनस्तमेव विषयमाह ॥
हे इन्द्र ! ये वयं त्वे सचा वर्त्तेमहि वयं त्वाभिनोनुमस्तानस्मानस्मान् सततमिदुदव ॥४॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
The theme of ruler and people relation still continues.
O ruler! we should behave truthfully among ourselves. We always bow to your command and respect. Let you ever protect us positively.
