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दश॑ ते क॒लशा॑नां॒ हिर॑ण्यानामधीमहि। भू॒रि॒दा अ॑सि वृत्रहन् ॥१९॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

daśa te kalaśānāṁ hiraṇyānām adhīmahi | bhūridā asi vṛtrahan ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

दश॑। ते॒। क॒लशा॑नाम्। हिर॑ण्यानाम्। अ॒धी॒म॒हि। भू॒रि॒ऽदाः। अ॒सि॒। वृ॒त्र॒॒ऽह॒न् ॥१९॥

ऋग्वेद » मण्डल:4» सूक्त:32» मन्त्र:19 | अष्टक:3» अध्याय:6» वर्ग:30» मन्त्र:3 | मण्डल:4» अनुवाक:3» मन्त्र:19


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स्वामी दयानन्द सरस्वती

फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

पदार्थान्वयभाषाः - हे (वृत्रहन्) शत्रुओं के नाश करनेवाले ! जिससे आप (भूरिदाः) बहुतों के देनेवाले (असि) हो इससे (ते) आपके (हिरण्यानाम्) सुवर्ण के बने हुए (कलशानाम्) घटों के (दश) दशसंख्यायुक्त समूह को हम लोग (अधीमहि) प्राप्त होवें ॥१९॥
भावार्थभाषाः - जो मनुष्य बहुत देनेवाला होता है, उसके मित्र बहुत होते हैं ॥१९॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

दश 'हिरण्य कलश'

पदार्थान्वयभाषाः - [१] प्रस्तुत ऋग्वेद के दस मण्डल मानो दस कलश हैं, जो कि हितरमणीय ज्ञानजल से परिपूर्ण हैं। हे प्रभो! हम ते आपके इन दश-दस (हिरण्यानाम्) = हितरमणीय ज्ञान-जल से परिपूर्ण कलशानाम्-कलशों का घटों का अधीमहि स्मरण करते हैं इन्हें धारण करने का प्रयत्न करते हैं। इनके धारण से हमारे जीवन में प्राण श्रधा आदि सब कलाओं का उत्तम निवास होगा 'कला: शेरते अस्मिन्' । [२] हे वृत्रहन्- सब वासनाओं को विनष्ट करनेवाले प्रभो! आप निश्चय से भूरिदाः = अत्यन्त देनेवाले असि-हैं। 'भूरि' = जीवन पालन व पोषण के लिए आवश्यक सब वस्तुओं के देनेवाले हैं। इस वेदज्ञान से हमारा जीवन सब कलाओं से परिपूर्ण हो जाता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम दश हिरण्य-कलशों का धारण करें।
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स्वामी दयानन्द सरस्वती

पुनस्तमेव विषयमाह ॥

अन्वय:

हे वृत्रहन् ! यतस्त्वं भूरिदा असि तस्मात्ते हिरण्यानां कलशानां दशाधीमहि ॥१९॥

पदार्थान्वयभाषाः - (दश) (ते) तव (कलशानाम्) घटानाम् (हिरण्यानाम्) (अधीमहि) प्राप्नुयाम (भूरिदाः) बहूनां दाता (असि) (वृत्रहन्) शत्रुहन्ता ॥१९॥
भावार्थभाषाः - यो मनुष्यो बहुप्रदो भवति तस्य मित्राणि बहूनि जायन्ते ॥१९॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - We study, research and produce tens of jars of liquid gold. Destroyer of ignorance and poverty, you are the giver and creator of unbounded wealth.
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आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड

The relations between a ruler and wealthy men on one side, and teachers and preachers on the other side are narrated.

अन्वय:

O ruler! you finish your enemies and with the exploits give away money to the teachers and preachers. Let us receive tens of pitchers full of golden coins.

भावार्थभाषाः - One who is a philanthropist and gives plenty to others, such a ruler of rich person earns the friendship of several other persons.
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माता सविता जोशी

(यह अनुवाद स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के आधार पर किया गया है।)
भावार्थभाषाः - जो माणूस दानी असतो त्याचे मित्र खूप असतात. ॥ १९ ॥