वांछित मन्त्र चुनें

स॒हस्रा॑ ते श॒ता व॒यं गवा॒मा च्या॑वयामसि। अ॒स्म॒त्रा राध॑ एतु ते ॥१८॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

sahasrā te śatā vayaṁ gavām ā cyāvayāmasi | asmatrā rādha etu te ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

स॒हस्रा॑। ते॒। श॒ता। व॒यम्। गवा॑म्। आ। च्या॒व॒या॒म॒सि॒। अ॒स्म॒ऽत्रा। राधः॑। ए॒तु॒। ते॒ ॥१८॥

ऋग्वेद » मण्डल:4» सूक्त:32» मन्त्र:18 | अष्टक:3» अध्याय:6» वर्ग:30» मन्त्र:2 | मण्डल:4» अनुवाक:3» मन्त्र:18


0 बार पढ़ा गया

स्वामी दयानन्द सरस्वती

फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

पदार्थान्वयभाषाः - हे धन के ईश (ते) आप का (राधः) धन (अस्मत्रा) हम लोगों में (एतु) प्राप्त हो और (ते) आपकी (गवाम्) गौ के (सहस्रा) हजारों और (शता) सैकड़ों समूह को (वयम्) हम लोग (आ, च्यावयामसि) प्राप्त कराते हैं ॥१८॥
भावार्थभाषाः - हे धनाढ्य ! आपके समीप से हम लोग गौ आदि पदार्थों को प्राप्त होकर औरों के लिये देते हैं और हम लोगों का धन आपको प्राप्त हो ॥१८॥
0 बार पढ़ा गया

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

ज्ञानैश्वर्य की प्राप्ति

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे प्रभो ! गतमन्त्र के अनुसार सोम का रक्षण करके, उस सोम से ज्ञानाग्नि की दीप्ति द्वारा (वयम्) = हम (ते) = आपकी (गवाम्) = वेदवाणियों के (शता सहस्त्रा) = सैंकड़ों व हजारों को (आच्यावयामसि) = अपने अन्दर प्राप्त करते हैं। सुरक्षित सोम से बुद्धि की तीव्रता प्राप्त होती है। इस तीव्र बुद्धि से हम ज्ञानवाणियों को प्राप्त करते हैं । [२] हे प्रभो ! (ते राधः) = आपका यह ज्ञानैश्वर्य (अस्मत्रा एतु) = हमारे जीवन में प्राप्त हो । इस ज्ञानैश्वर्य द्वारा ही हम अपने जीवनों को पवित्र व सफल बना पाएँगे।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम शतशः ज्ञानवाणियों को प्राप्त करें। प्रभु का ज्ञानैश्वर्य हमारे जीवन की सफलता का साधन बने।
0 बार पढ़ा गया

स्वामी दयानन्द सरस्वती

पुनस्तमेव विषयमाह ॥

अन्वय:

हे धनेश ! ते राधोऽस्मत्रैतु ते तव गवां सहस्रा शता वयमाच्यावयामसि ॥१८॥

पदार्थान्वयभाषाः - (सहस्रा) सहस्राणि (ते) तव (शता) शतानि (वयम्) (गवाम्) (आ) (च्यावयामसि) प्रापयामः (अस्मत्रा) अस्मासु (राधः) धनम् (एतु) प्राप्नोतु (ते) तव ॥१८॥
भावार्थभाषाः - हे धनाढ्य ! तव सकाशाद्वयं गवादीन् प्राप्याऽन्येभ्यो दद्मः। अस्माकं धनं भवन्तं प्राप्नोतु ॥१८॥
0 बार पढ़ा गया

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Indra, lord of excellence and beneficence, we activate and accelerate a hundred and thousand schemes of development of research and extension of knowledge, enrichment and fertility of lands and improvement of cows, other cattle wealth and milk products, and hope that the wealth and prosperity of your social order would benefit us all.
0 बार पढ़ा गया

आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड

Again the subject of teachers and preachers is brought in.

अन्वय:

O master of wealth! let us get plenty of wealth from you. In fact, it is we, who get you cattle wealth in large numbers.

भावार्थभाषाः - O master of wealth! we get from you cattle wealth and other forms of wealth resources. In return, we are inclined to give you our wealth of wisdom.
0 बार पढ़ा गया

माता सविता जोशी

(यह अनुवाद स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के आधार पर किया गया है।)
भावार्थभाषाः - हे धनाढ्य लोकांनो! तुमच्याकडून आम्ही गाई वगैरे पदार्थ प्राप्त करून इतरांना देतो व आमचे धन तुम्हाला मिळते. ॥ १८ ॥