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प्र ते॑ वोचाम वी॒र्या॒३॒॑ या म॑न्दसा॒न आरु॑जः। पुरो॒ दासी॑र॒भीत्य॑ ॥१०॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

pra te vocāma vīryā yā mandasāna ārujaḥ | puro dāsīr abhītya ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

प्र। ते॒। वो॒चा॒म॒। वी॒र्या॑। याः। म॒न्द॒सा॒नः। आ। अरु॑जः। पुरः॑। दासीः॑। अ॒भि॒ऽइत्य॑ ॥१०॥

ऋग्वेद » मण्डल:4» सूक्त:32» मन्त्र:10 | अष्टक:3» अध्याय:6» वर्ग:28» मन्त्र:5 | मण्डल:4» अनुवाक:3» मन्त्र:10


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स्वामी दयानन्द सरस्वती

फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

पदार्थान्वयभाषाः - हे राजन् ! (मन्दसानः) कामना करते हुए आप शत्रुओं की (याः) जो (दासीः) सेविकाओं के सदृश (आ, अरुजः) सब प्रकार रोगयुक्त (पुरः) नगरियों को (अभीत्य) सब ओर से प्राप्त होकर जीतते हो उन (ते) आपके (वीर्य्या) बल, पराक्रम से युक्त कर्म्मों का हम लोग (प्र, वोचाम) उपदेश करें ॥१०॥
भावार्थभाषाः - जो राजा शत्रुओं का पराजय कर सके, वही राज्य करने को योग्य हो ॥१०॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

दास-पुर विध्वंस

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे प्रभो ! (मन्दसान:) = अत्यन्त आनन्दमय होते हुए आप अपने भक्तों को आनन्दित करनेवाले आप (या:) = जिन (दासी:) = हमारा उपक्षय करनेवाले काम-क्रोध आदि शत्रुओं के (पुरः) = नगरों को (अभीत्य) = आक्रमण करके (आरुजः) = छिन्न-भिन्न कर देते हैं, तो हम (ते) = आपके (वीर्या) = उन शक्तिशाली कर्मों का (प्रवोचाम) = प्रवचन करते हैं। [२] प्रभु का उपासन हमारे जीवन में असुरपुरियों का विध्वंस करके पवित्रता का संचार करता है। यह पवित्रता जीवन में आनन्द का कारण बनती है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- प्रभु हमारे जीवनों में असुर-पुरियों का विध्वंस करके, पवित्रता द्वारा आनन्द प्राप्त करते हैं ।
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स्वामी दयानन्द सरस्वती

पुनस्तमेव विषयमाह ॥

अन्वय:

हे राजन् ! मन्दसानस्त्वं शत्रूणां या दासीरिवारुजः पुरोऽभीत्य विजयसे तस्य ते वीर्या वयं प्रवोचाम ॥१०॥

पदार्थान्वयभाषाः - (प्र) (ते) तव (वोचाम) उपदिशेम (वीर्या) बलपराक्रमयुक्तानि कर्म्माणि (याः) (मन्दसानः) कामयमानः (आ, अरुजः) समन्ताद्रोगयुक्ताः (पुरः) नगरीः (दासीः) सेविकाः (अभीत्य) अभितः प्राप्य ॥१०॥
भावार्थभाषाः - यो राजा शत्रूणां पराजयं कर्त्तुं शक्नुयात् स एव राज्यं कर्तुमर्हेत् ॥१०॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Indra, lord of might, joyous and brilliant victor, we sing and celebrate those warlike exploits of yours in which you stormed the fortresses of slavery and broke them open into freedom.
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आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड

The teacher and preacher are further described.

अन्वय:

O king ! cherishing a great ambition, you treat your enemies with scant respect as is meted out to the maidservants. After winning the towns, you make their vanished citizens free from diseases. Let us tell to others about your heroic deeds.

भावार्थभाषाः - A ruler who is capable to defeat his foes, only he can rule over the kingdom.
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माता सविता जोशी

(यह अनुवाद स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के आधार पर किया गया है।)
भावार्थभाषाः - जो राजा शत्रूंचा पराजय करू शकतो, तोच राज्य करण्यायोग्य असतो. ॥ १० ॥