सं यत्त॑ इन्द्र म॒न्यवः॒ सं च॒क्राणि॑ दधन्वि॒रे। अध॒ त्वे अध॒ सूर्ये॑ ॥६॥
saṁ yat ta indra manyavaḥ saṁ cakrāṇi dadhanvire | adha tve adha sūrye ||
सम्। यत्। ते॒। इ॒न्द्र॒। म॒न्यवः॑। सम्। च॒क्राणि॑। द॒ध॒न्वि॒रे। अध॑। त्वे इति॑। अध॑। सूर्ये॑ ॥६॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
प्रभुचिन्तन व कर्त्तव्यकर्मों का करना
स्वामी दयानन्द सरस्वती
पुनस्तमेव विषयमाह ॥
हे इन्द्र ! ते यन्मन्यवश्चक्राणि संदधन्विरेऽध त्वे धनं दधत्यध ते सूर्य्ये प्रकाश इव प्रतापं संदधन्विरे ॥६॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
The relations between a ruler and his subjects are referred.
O Indra! you are a mighty soul. You run all your behavior like anger etc. in a cycle of actions and thus hold wealth.
