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अस्वा॑पयद्द॒भीत॑ये स॒हस्रा॑ त्रिं॒शतं॒ हथैः॑। दा॒साना॒मिन्द्रो॑ मा॒यया॑ ॥२१॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

asvāpayad dabhītaye sahasrā triṁśataṁ hathaiḥ | dāsānām indro māyayā ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

अस्वा॑पयत्। द॒भीत॑ये। स॒हस्रा॑। त्रिं॒शत॑म्। हथैः॑। दा॒साना॑म्। इन्द्रः॑। मा॒यया॑ ॥२१॥

ऋग्वेद » मण्डल:4» सूक्त:30» मन्त्र:21 | अष्टक:3» अध्याय:6» वर्ग:23» मन्त्र:1 | मण्डल:4» अनुवाक:3» मन्त्र:21


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स्वामी दयानन्द सरस्वती

फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥

पदार्थान्वयभाषाः - जो (इन्द्रः) राजा (मायया) बुद्धि से (दासानाम्) सेवकों और शत्रुओं के (हथैः) हननसाधनों से (दभीतये) हिंसन करने के लिये (सहस्रा) असंख्य (त्रिंशतम्) वा तीस को (अस्वापयत्) सुलावे, वही जीतनेवाला होवे ॥२१॥
भावार्थभाषाः - जो सेनापति आदि बुद्धि से शत्रुओं का नाश करें, वे सदा ही सुखी होवें ॥२१॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

'दभीति' के शत्रुओं का सो जाना

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (इन्द्रः) = सब शत्रुओं का विद्रावण करनेवाले प्रभु (मायया) = अपने अद्भुत ज्ञान व सामर्थ्य से [ extraordinary power, wisdom] अथवा दया से [ pity, compassion] (दासानाम्) = हमारा उपक्षय करनेवाली (त्रिंशतं सहस्त्रा) = तीसों हजार आसुर वृत्तियों को (हथैः) = हननसाधन आयुधों से (अस्वापयत्) = सुला देते हैं। प्रभु की शक्ति से आसुरभावों का विनाश होता है। [२] प्रभु यह आसुरभावों का विनाश (दभीतये) = दभीति के लिए करते हैं। उस व्यक्ति के लिए करते हैं, जो कि आसुरभावों के हिंसन के लिए यत्नशील होते हैं। प्रभु हमारे लिए साधन प्राप्त कराते हैं, उन साधनों को क्रिया में परिणत करने के लिए शक्ति देते हैं। इन साधनों का ठीक प्रयोग करने की प्रेरणा देते हुए वे प्रभु इस 'दभीति' के लिए सहायक होते हैं ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम काम क्रोध आदि शत्रुओं के हिंसन में प्रवृत्त हों। प्रभु के साहाय्य से हम अवश्य सफल होंगे।
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स्वामी दयानन्द सरस्वती

पुनस्तमेव विषयमाह ॥

अन्वय:

य इन्द्रो मायया दासानां सेवकानां शत्रूणां हथैर्दभीतये सहस्रा त्रिंशतमस्वापयत् स एव विजयवान् भवेत् ॥२१॥

पदार्थान्वयभाषाः - (अस्वापयत्) स्वापयेत् (दभीतये) हिंसनाय (सहस्रा) असंख्यानि (त्रिंशतम्) एतत्संख्यातम् (हथैः) हननैः (दासानाम्) सेवकानाम् (इन्द्रः) राजा (मायया) प्रज्ञया ॥२१॥
भावार्थभाषाः - ये सेनापत्यादयो बुद्ध्या शत्रून् हन्युस्ते सदैव सुखिनः स्युः ॥२१॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Indra, the ruler, should smash three hundred thousand of social saboteurs with weapons of far reaching calibre for the peace and security of the law- abiding servants of the nation and for keeping down of the violent.
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आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड

The subject of administration is again compared with the sun.

अन्वय:

A ruler who defeats his hundreds or few enemies and kills them with several weapons and armament, he is capable to provide relief and peace to the State officials. Finally he wins the battle.

भावार्थभाषाः - A ruler who appoints a commander capable to destroy his enemies with his skill and intelligence, he is always happy.
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माता सविता जोशी

(यह अनुवाद स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के आधार पर किया गया है।)
भावार्थभाषाः - जे सेनापती इत्यादी बुद्धीने शत्रूंचा नाश करतात ते सदैव सुखी होतात. ॥ २१ ॥