स्वामी दयानन्द सरस्वती
अब राजदण्ड की प्रकर्षता को अगले मन्त्र में कहते हैं ॥
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
दिन-रात चलनेवाला यज्ञ
स्वामी दयानन्द सरस्वती
अथ राजदण्डप्रकर्षतामाह ॥
यो राजा यजमानो नाऽसिक्न्यामभयस्य होता स्यात् स एव सततं मोदेत ॥१५॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
The significance of firm dealing in administration under law by a king is told.
That king always enjoys happiness who like a Yajamana (performer of Yajna) is giver of fearlessness at night time.
