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अग्ने॑ द्यु॒म्नेन॑ जागृवे॒ सह॑सः सूनवाहुत। एदं ब॒र्हिः स॑दो॒ मम॑॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

agne dyumnena jāgṛve sahasaḥ sūnav āhuta | edam barhiḥ sado mama ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

अग्ने॑। द्यु॒म्नेन॑। जा॒गृ॒वे॒। सह॑सः। सू॒नो॒ इति॑। आ॒ऽहु॒त॒। आ। इ॒दम्। ब॒र्हिः। स॒दः॒। मम॑॥

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ऋग्वेद » मण्डल:3» सूक्त:24» मन्त्र:3 | अष्टक:3» अध्याय:1» वर्ग:24» मन्त्र:3 | मण्डल:3» अनुवाक:2» मन्त्र:3


स्वामी दयानन्द सरस्वती

फिर राजधर्म विषय को अगले मन्त्र में कहा है।

पदार्थान्वयभाषाः - हे (जागृवे) राजधर्म के उत्तम प्रकार निर्वाहक (सहसः) बलवान् के (सूनो) पुत्र दुष्टों के नाशकर्त्ता (आहुत) चारों ओर से पुकारे गये (अग्ने) प्रतापयुक्त राजन् ! (द्युम्नेन) यशकारक धन के सहित विराजमान आप (मम) मेरे (इदम्) इस वर्त्तमान (बर्हिः) अत्यन्त श्रेष्ठ (सदः) बैठने योग्य आसन का (आ, जुषस्व) अच्छे प्रकार सेवन करो ॥३॥
भावार्थभाषाः - जो राजपुरुष यश बलयुक्त राजधर्म में कुशल न्यायाधीश हों, वे अखण्डित राज्य की पालना कर सकें ॥३॥

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

हृदय को प्रभु का आसन बनाना

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (अग्ने) = अग्रणी प्रभो ! (द्युम्नेन जागृवे) = ज्ञान-ज्योति से जागनेवाले प्रभो! [वैसे तो प्रभु सदा सर्वत्र व्याप्त हैं, पर प्रभु का दर्शन ज्ञान ज्योति के जगने पर ही होता है] (सहसः सूनो) = हे बल के पुञ्ज प्रभो! (आ-हुत) = [आहुतं यस्य] चारों ओर जिनके दान विद्यमान हैं ऐसे प्रभो ! आप (मम) = मेरे (इदम्) = इस (बर्हिः) = वासना शून्य हृदय में (आसद:) = आसीन होइये । [२] प्रभु को हृदयासन पर बिठाने का तरीका यही है कि हम हृदय को वासनाशून्य बनाएँ। यदि हम ऐसा करेंगे तो प्रभु हमें आगे और आगे ले चलेंगे [अग्नि], प्रभु हमारे रक्षक होंगे [जागृति] हमें शक्ति प्राप्त कराएँगे [सहस्] तथा सब आवश्यक पदार्थों को प्राप्त कराएँगे [आहुत] ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम प्रभु को हृदयासन पर आसीन करें। प्रभु हमारी सब उन्नतियों को सिद्ध करेंगे।

स्वामी दयानन्द सरस्वती

पुनः राजधर्मविषयमाह।

अन्वय:

हे जागृवे सहसः सूनावाहुताऽग्ने द्युम्नेन सह वर्त्तमानस्त्वं ममेदं बर्हिः सद आजुषस्व ॥३॥

पदार्थान्वयभाषाः - (अग्ने) प्रकाशयुक्त राजन् (द्युम्नेन) यशस्विना धनेन (जागृवे) जागरूक (सहसः) बलवतः (सूनो) पुत्र दुष्टानां हिंसक (आहुत) समन्तात्कृताह्वान (आ) (इदम्) वर्त्तमानम् (बर्हिः) अतीवोत्तमम् (सदः) स्थित्यर्हमासनम् (मम) ॥३॥
भावार्थभाषाः - ये राजपुरुषा यशोबलयुक्ता राजधर्मे जागरूका न्यायाधीशाः स्युस्तेऽखण्डितं राज्यं पालयितुं शक्नुयुः ॥३॥

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Agni, lord of light and lustre, ever awake and alert, child of omnipotence and destroyer of evil and adversity, invoked and invited, come with wealth and honours of life and seat yourself on this holy grass of my yajna.

आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड

The duties of a ruler are told further.

अन्वय:

O resplendent ruler! you shine like the fire. O ever vigilant in the discharge of royal duties! O son of the mighty person! invoked by men from all sides, come and sit on this highly elevated and good seat, because you are blessed with the glorious wealth.

भावार्थभाषाः - Those rulers or officers of the State who are reputed for good conduct and strength and are ever alert in the discharge of their public duties towards the State, indeed, they are true dispensers of justice and are competent to guard the frontiers of vast kingdom.

माता सविता जोशी

(यह अनुवाद स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के आधार पर किया गया है।)
भावार्थभाषाः - जे राजपुरुष यश व बलयुक्त असून राजधर्मात कुशल न्यायाधीश असतील त्यांनी अखंडित राज्याचे पालन करावे. ॥ ३ ॥