श्रेष्ठं॑ यविष्ठ भार॒ताग्ने॑ द्यु॒मन्त॒मा भ॑र। वसो॑ पुरु॒स्पृहं॑ र॒यिम्॥
śreṣṭhaṁ yaviṣṭha bhāratāgne dyumantam ā bhara | vaso puruspṛhaṁ rayim ||
श्रेष्ठ॑म्। य॒वि॒ष्ठ॒। भा॒र॒त॒। अग्ने॑। द्यु॒ऽमन्त॑म्। आ। भ॒र॒। वसो॒ इति॑। पु॒रु॒ऽस्पृह॑म्। र॒यिम्॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
अब छः चावाले सातवें सूक्त का आरम्भ है। उसके प्रथम मन्त्र में विद्वानों के गुणों का वर्णन करते हैं।
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
'श्रेष्ठ-द्युमान् पुरुस्पृह' रयि
स्वामी दयानन्द सरस्वती
अथ विद्वद्गुणानाह।
हे वसो भारत यविष्ठाऽग्ने त्वं श्रेष्ठ द्युमन्तं पुरुस्पृहं रयिमा भर ॥१॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
Significance of industriousness explains.
O Lord! you are the source of happiness, giver of knowledge and learning, full of youthful spirits and bright like fire. You get for us wealth and prosperity which is. illuminating, desirable and does good to others.
माता सविता जोशी
(यह अनुवाद स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के आधार पर किया गया है।)या सूक्तात विद्वान व अग्नीच्या गुणांचे वर्णन असल्यामुळे या सूक्ताच्या अर्थाची मागच्या सूक्ताच्या अर्थाबरोबर संगती जाणली पाहिजे.
