प्र वः॑ स॒तां ज्येष्ठ॑तमाय सुष्टु॒तिम॒ग्नावि॑व समिधा॒ने ह॒विर्भ॑रे। इन्द्र॑मजु॒र्यं ज॒रय॑न्तमुक्षि॒तं स॒नाद्युवा॑न॒मव॑से हवामहे॥
pra vaḥ satāṁ jyeṣṭhatamāya suṣṭutim agnāv iva samidhāne havir bhare | indram ajuryaṁ jarayantam ukṣitaṁ sanād yuvānam avase havāmahe ||
प्र। वः॒। स॒ताम्। ज्येष्ठ॑तमाय। सु॒ऽस्तु॒तिम्। अ॒ग्नौऽइ॑व। स॒म्ऽइ॒धा॒ने। ह॒विः। भ॒रे॒। इन्द्र॑म्। अ॒जु॒र्यम्। ज॒रय॑न्तम्। उ॒क्षि॒तम्। स॒नात्। युवा॑नम्। अव॑से। ह॒वा॒म॒हे॒॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
अब नव चावाले सोलहवें सूक्त का आरम्भ है। उसके प्रथम मन्त्र में बिजली के विषय को कहते हैं।
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
सन्ध्या-हवन-प्रार्थना
स्वामी दयानन्द सरस्वती
अथ विद्युद्विषयमाह।
हे विद्वांसो वयं सतां वो ज्येष्ठतमायावसे हविर्भरे समिधानेऽग्नाविव सुष्टुतिं हवामहे सनाद्युवानमुक्षितमजुर्यं जरयन्तमिन्द्रं प्रहवामहे ॥१॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
Knowledge about electricity/power/energy is mentioned below.
O scholars ! we should possess or store the eatables in large quantities for the protection of your great people. The way oblations inflame the fire, the same way our adorations should be acceptable to you. The energy keeps the body young, constantly strong and capable to inseminate, and it brings anxiety and old age to other foes.
माता सविता जोशी
(यह अनुवाद स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के आधार पर किया गया है।)या सूक्तात विद्युत, विद्वान, सूर्य व विद्वानांच्या गुणांचे वर्णन असल्यामुळे या सूक्ताच्या अर्थाची मागच्या सूक्ताच्या अर्थाबरोबर संगती जाणली पाहिजे.
