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श॒तं वो॑ अम्ब॒ धामा॑नि स॒हस्र॑मु॒त वो॒ रुह॑: । अधा॑ शतक्रत्वो यू॒यमि॒मं मे॑ अग॒दं कृ॑त ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

śataṁ vo amba dhāmāni sahasram uta vo ruhaḥ | adhā śatakratvo yūyam imam me agadaṁ kṛta ||

पद पाठ

श॒तम् । वः॒ । अ॒म्ब॒ । धामा॑नि । स॒हस्र॑म् । उ॒त । वः॒ । रुहः॑ । अध॑ । श॒त॒ऽक्र॒त्वः॒ । यू॒यम् । इ॒मम् । मे॒ । अ॒ग॒दम् । कृ॒त॒ ॥ १०.९७.२

ऋग्वेद » मण्डल:10» सूक्त:97» मन्त्र:2 | अष्टक:8» अध्याय:5» वर्ग:8» मन्त्र:2 | मण्डल:10» अनुवाक:8» मन्त्र:2


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ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (अम्ब) हे माता के समान निर्माण करनेवाली सेवन करने योग्य आश्रयरूप ओषधियो ! (वः) तुम्हारे (शतम्) बहुत (धामानि) प्रयोगस्थान हैं (उत) और (वः) तुम्हारे (सहस्रम्) बहुत से (रुहः) रोहण-उत्पत्तिक्रम हैं (अध) और (यूयम्) तुम (शतक्रत्वः) बहुत कर्मवाली बहुत उपयोगवाली हो (मे) मेरे (इमम्) इस रोगी को (अगदम्) रोगरहित (कृत) करो ॥२॥
भावार्थभाषाः - ओषधियाँ जीवन का निर्माण करनेवाली होती हैं, इनके उत्पत्तिस्थानों तथा उगने के प्रकारों को जानकर रोगी को स्वस्थ करना चाहिये ॥२॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

मातृतुल्य ओषधियाँ

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (अम्ब) = मातृवत् हितकारिणी ओषधियो ! (वः) = तुम्हारे (धामानि) = तेज (शतम्) = सैंकड़ों हैं। (उत) = और (वः) = तुम्हारे (रुहः) = प्रादुर्भाव - विकास (सहस्त्रम्) = हजारों ही हैं। (अधा) = अब (शतक्रत्वः) = सैंकड़ों शक्तियोंवाली (यूयम्) = तुम (मे) = मेरे (इमम्) = इस शरीर को (अगदम्) = रोगशून्य कृत करो। [२] हजारों प्रकार की ओषधियाँ हैं। सबके अन्दर अद्भुत शक्तिदायक तत्त्व निहित हैं। इनके ठीक सेवन से शरीर नीरोग बना रहता है। वस्तुतः ये ओषधियाँ वनस्पतियाँ मातृवत् हितकारिणी हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - ओषधियाँ अपने तेजों से हमारे शरीरों को नीरोग करती हैं।
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ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (अम्ब वः शतं धामानि) हे मातृवत् सम्भजनीया आश्रयणीयाः ! युष्माकं शतं बहूनि प्रयोगस्थानानि (उत) अपि (वः सहस्रं रुहः) युष्माकं बहवः प्रादुर्भावाः-उद्गमभेदा वा (अध) अथ च (यूयं शतक्रत्वः) यूयं बहुकर्माणो बहूपयोग्याः (मे-इमम्-अगदं कृत) मम खल्वेतं रुग्णं जनं रोगरहितं कुरुत ॥२॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O mother herb, hundreds are the places where you arise and work, thousands your varieties and extensions, and hundreds your gifts and efficacies. Pray make this life free from affliction and disease.