वांछित मन्त्र चुनें

या ओष॑धी॒: सोम॑राज्ञी॒र्विष्ठि॑ताः पृथि॒वीमनु॑ । बृह॒स्पति॑प्रसूता अ॒स्यै सं द॑त्त वी॒र्य॑म् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

yā oṣadhīḥ somarājñīr viṣṭhitāḥ pṛthivīm anu | bṛhaspatiprasūtā asyai saṁ datta vīryam ||

पद पाठ

याः । ओष॑धीः । सोम॑ऽराज्ञीः । विऽस्थि॑ताः । पृ॒थि॒वीम् । अनु॑ । बृ॒ह॒स्पति॑ऽप्रसूताः । अ॒स्यै । सम् । द॒त्त॒ । वी॒र्य॑म् ॥ १०.९७.१९

ऋग्वेद » मण्डल:10» सूक्त:97» मन्त्र:19 | अष्टक:8» अध्याय:5» वर्ग:11» मन्त्र:4 | मण्डल:10» अनुवाक:8» मन्त्र:19


0 बार पढ़ा गया

ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (याः) जो (ओषधीः) ओषधियाँ (सोमराज्ञीः) अमृत गुणवाली (पृथिवीम्-अनु) पृथिवी को आश्रय करके (विष्ठिताः) विविधरूप से स्थित हैं (बृहस्पतिः-प्रसूताः) वे महाविद्वान् वैद्य के द्वारा प्रेरित-प्रयुक्त की हुईं-दी हुईं (अस्यै) इस रुग्ण देह के लिए (वीर्यम्) रोगनाशक बल को (सं दत्त) संयुक्त करो ॥१९॥
भावार्थभाषाः - अमृत गुणवाली ओषधियाँ, जो पृथिवी पर मिलती हैं, वे सुयोग्य वैद्य के द्वारा रोगनाशक बल रोगी के देह में देती हैं ॥१९॥
0 बार पढ़ा गया

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

शक्ति का संपादन

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (या:) = जो (ओषधी:) = ओषधियाँ (सोमराज्ञी:) = सोमलता नामक राजा वाली हैं, वे (पृथिवीं अनुविष्ठिताः) = इस पृथिवी पर, पृथ्वी से शक्ति व गुणों को प्राप्त करके विशेषरूप से स्थित हैं । पृथिवी के भेद से भी ओषधियों के गुणों में अन्तर आ ही जाता है । [२] हे ओषधियो ! आप (बृहस्पति प्रसूता:) = ज्ञानी वैद्य से प्रेरित की जाकर (अस्यै) = इस रुग्णशरीर के लिए (वीर्यं संदत्त) = शक्ति को देनेवाली होवो। ओषधियाँ शरीर में शक्ति को पैदा करके रोगों को नष्ट करनेवाली हों ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- ओषधियाँ शरीर को शक्ति सम्पन्न बनाएँ ।
0 बार पढ़ा गया

ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (याः-ओषधीः-सोमराज्ञीः) या ओषधयो-अमृतगुणवत्यः (पृथिवीम्-अनु विष्ठिताः) पृथिवीमाश्रित्य-विविधरूपेण स्थिताः (बृहस्पति-प्रसूताः) महाविदुषा वैद्येन प्रेरिताः-प्रयुक्ताः (अस्यै) रुग्णायै तन्वै (वीर्यं सं दत्त) वीर्यं संयुक्तं कुरुत ॥१९॥
0 बार पढ़ा गया

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - You herbs which shine and abound in soma element and overspread the earth, blest by Brhaspati and energised by the sun, pray bless this ailing body with life saving vitality.