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यो न॑: पि॒ता ज॑नि॒ता यो वि॑धा॒ता धामा॑नि॒ वेद॒ भुव॑नानि॒ विश्वा॑ । यो दे॒वानां॑ नाम॒धा एक॑ ए॒व तं स॑म्प्र॒श्नं भुव॑ना यन्त्य॒न्या ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

yo naḥ pitā janitā yo vidhātā dhāmāni veda bhuvanāni viśvā | yo devānāṁ nāmadhā eka eva taṁ sampraśnam bhuvanā yanty anyā ||

पद पाठ

यः । नः॒ । पि॒ता । ज॒नि॒ता । यः । वि॒ऽधा॒ता । धामा॑नि । वेद॑ । भुव॑नानि । विश्वा॑ । यः । दे॒वाना॑म् । ना॒म॒ऽधाः । एकः॑ । ए॒व । तम् । स॒म्ऽप्र॒श्नम् । भुव॑ना । य॒न्ति॒ । अ॒न्या ॥ १०.८२.३

ऋग्वेद » मण्डल:10» सूक्त:82» मन्त्र:3 | अष्टक:8» अध्याय:3» वर्ग:17» मन्त्र:3 | मण्डल:10» अनुवाक:6» मन्त्र:3


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ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (यः-नः-जनिता पिता) जो हमारा उत्पादक पालक परमात्मा (यः-विधाता) जो कर्मफल का विधान करनेवाला-देनेवाला (विश्वा धामानि) सारे जन्मों स्थानों (भुवनानि) लोक-लोकान्तरों को (वेद) जानता है (यः) जो (देवानां) अग्न्यादि दिव्यगुण पदार्थों का (नामधाः) नामधारक-नाम रखनेवाला है (तं सम्प्रश्नम्) उस सम्यक् प्रश्न करने योग्य-जानने योग्य परमात्मा को (अन्या भुवना यन्ति) अन्य लोक-लोकान्तर तथा जीव अपना आश्रय बनाते हैं ॥३॥
भावार्थभाषाः - परमात्मा संसार के पदार्थों को उत्पन्न करनेवाला, वेद में उनके नाम रखनेवाला, सब का जानने योग्य और आश्रयरूप है, उसको मानना और उसकी उपासना करनी चाहिए ॥३॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

'संप्रश्न' प्रभु

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (यः) = जो (नः पिता) = हम सब के रक्षक हैं, (जनिता) = हम सबको जन्म देनेवाले हैं अथवा हम सबकी शक्तियों के विकास का कारण होते हैं, (यः विधाता) = जो विशिष्ट रूप से हमारा धारण करनेवाले हैं, जो (विश्वा) = सब (धामानि) = तेजों को व (भुवनानि) = लोकों को (वेद) = जानते हैं, हमारे कर्मों के अनुसार इन तेजों व लोकों को वे प्रभु हमें प्राप्त कराते हैं । [२] (यः) = जो एक (एव) = अकेले ही (देवाना नामध:) = सब देवों के नाम को धारण करनेवाले हैं, अर्थात् इन सब देवों को देवत्व प्राप्त कराने के कारण इन सब के नामों से मुख्य रूप से प्रभु का ही प्रतिपादन होता है । वे प्रभु ही 'अग्नि, आदित्य, वायु, चन्द्रमा, शुक्र, ब्रह्म, आपः व प्रजापति' हैं। (तं संप्रश्नम्) = उस [ asylum refuge, आश्रयम्] उस शरण को ही (अन्या भुवना) = अन्य सब प्राणी (यन्ति) = जाते हैं । अर्थात् वे प्रभु ही सूर्यादि को दीप्ति प्राप्त कराके 'देव' शब्द से कहलाने योग्य बनाते हैं और प्राणिमात्र की वे प्रभु ही शरण हैं। अचेतन चेतन सभी के रक्षक वे ही हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - प्रभु ही हमारे 'पिता, जनिता व विधाता' हैं। सूर्यादि देवों को वे देवत्व प्राप्त कराते हैं, तो सब प्राणियों को शरण देते हैं ।
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ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (यः-नः-जनिता पिता) योऽस्माकमुत्पादयिता पालकः परमात्मा (यः-विधाता) यः कर्मफलविधाता (विश्वा धामानि भुवनानि वेद) सर्वाणि जन्मानि स्थानानि लोकलोकान्तराणि जानाति (यः-देवानां नामधाः) योऽग्न्यादिदिव्यगुणवतां पदार्थानां नामानि दधाति (तं सम्प्रश्नम्-अन्या भुवना यन्ति) तं सम्यक् प्रष्टव्यं जिज्ञास्यं परमात्मदेवमन्यानि सर्वाणि भूतानि लोक-लोकान्तराणि च प्राप्नुवन्त्याश्रयन्ति ॥३॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Vishvakarma is our father and mother, he who is the sustainer, ruler and controller of existence, who knows all abodes and regions of the universe, who is the sole ordainer of the nature, functions and names of all divinities and the sole unity of all these in one, the one comprehensive question of all questions and the one complete answer to all questions, the one ultimate reality into whom all regions and worlds converge and merge.