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किं स्वि॑दासीदधि॒ष्ठान॑मा॒रम्भ॑णं कत॒मत्स्वि॑त्क॒थासी॑त् । यतो॒ भूमिं॑ ज॒नय॑न्वि॒श्वक॑र्मा॒ वि द्यामौर्णो॑न्महि॒ना वि॒श्वच॑क्षाः ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

kiṁ svid āsīd adhiṣṭhānam ārambhaṇaṁ katamat svit kathāsīt | yato bhūmiṁ janayan viśvakarmā vi dyām aurṇon mahinā viśvacakṣāḥ ||

पद पाठ

किम् । स्वि॒त् । आ॒सी॒त् । अ॒धि॒ऽस्थान॑म् । आ॒ऽरम्भ॑णम् । क॒त॒मत् । स्वि॒त् । क॒था । आ॒सी॒त् । यतः॑ । भूमि॑म् । ज॒नय॑न् । वि॒श्वऽक॑र्मा । वि । द्याम् । और्णो॑त् । म॒हि॒ना । वि॒श्वऽच॑क्षाः ॥ १०.८१.२

ऋग्वेद » मण्डल:10» सूक्त:81» मन्त्र:2 | अष्टक:8» अध्याय:3» वर्ग:16» मन्त्र:2 | मण्डल:10» अनुवाक:6» मन्त्र:2


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ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (किं स्वित्) विश्व के उत्पत्तिकाल में परमात्मा का क्या ही (अधिष्ठानम्-आसीत्) आश्रय था-होता है (कतमत् स्वित्) कौन सा ही (आरम्भणम् कथा-आसीत्) जगत् जिससे आरम्भ होता है, ऐसा मूल किस प्रकार का था या होता है (यतः) जिस मूल से (विश्वकर्मा) विश्व जिसका कर्म-शिल्प है, वह विश्व का रचयिता परमेश्वर (भूमिं दयां जनयन्) भुमिलोक द्युलोक-द्यावापृथिवीमय जगत् को उत्पन्न करता हुआ (विश्वचक्षाः) सर्वद्रष्टा परमात्मा (महिना) अपने महत्त्व से महती शक्ति से (व्यौर्णोत्) उसे विकसित करता है, सृष्टिरूप में फ़ैलाता है ॥२॥
भावार्थभाषाः - विश्व को उत्पन्न करते हुए आश्रय कौन था ? कौन होता है ? सृष्टि का मूल पदार्थ क्या है ? जिससे सृष्टि रची है। जिसे कार्यरूप में विकसित किया या परिणत करता है, द्युलोक पृथिवीलोकवाले जगद्रूप में, यह परमात्मा को मनन करने का प्रकार है। जगत् का मूल पदार्थ तथा उसको सृष्टि के रूप में लानेवाला कोई होना चाहिये ॥२॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

अधिष्ठान व आरम्भण ?

पदार्थान्वयभाषाः - [१] जब सृष्टि का प्रारम्भ हुआ तो उस समय (अधिष्ठानम्) = बैठने का स्थान, अर्थात् आधार (किंस्वित् आसीत्) = क्या था ? एक कारीगर किसी स्थान पर बैठकर ही तो अपने कार्य को करता है । उस 'विश्वकर्मा' ने भी किसी स्थान पर बैठकर ही तो इस विश्व को बनाया होगा। प्रश्न यह है कि यह अधिष्ठान क्या था ? [२] इसी प्रकार एक बढ़ई लकड़ी को लेकर ही मेज आदि को बनाने में प्रवृत्त होता है। ये लकड़ी आदि पदार्थ 'आरम्भण' कहलाते हैं, इनके द्वारा मेज आदि का आरम्भ किया जाता है। यह (आरम्भणम्) = सृष्टि का उपादानकारण (कतमत् स्वित्) = भला कौन - सा था ? कथा (आसीत्) = और वह कैसा था ? [३] वह आरम्भण, (यतः) = जिससे कि (भूमिं जनयन्) = इस भूमि को जन्म देता हुआ (विश्वकर्मा) = संसार का निर्माता तथा (विश्वचक्षाः) = सर्वद्रष्टा प्रभु (महिना) = अपनी महिमा से (द्याम्) = इस द्युलोक को (वि और्णोत्) = प्रकट करता है। इस भूमि व द्युलोक का आरम्भण कौन-सा था ?
भावार्थभाषाः - भावार्थ - प्रभु ने जब सृष्टि को बनाया तो उसका अधिष्ठान कौन-सा था तथा किस 'आरम्भण' को लेकर उसने इन द्यावा भूमि को बनाया ?
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ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (किं-स्वित्-अधिष्ठानम्-आसीत्) विश्वोत्पादनकाले तस्य किं खल्वाश्रयणमासीत् (कतमत् स्वित्-आरम्भणम् कथा-आसीत्) कतमद्धि यत आरभ्यते जगत् तत् कतमत् खलु मूलं कथं जातीयमासीत् “आरभ्यते‍अस्मादिति ल्युट्-अपादाने कृत्यल्युटो बहुलमिति वचनात्” (यत:) यतो मूलात् (विश्वकर्मा) विश्वं यस्य कर्म स विश्वरचयिता परमेश्वर: (भूमिं द्यां जनयन्) भुमिलोकं द्युलोकं च द्यावापृथिवीमयं जगज्-जनयन् (विश्वचक्षाः-महिना व्यौर्णोत्) विश्वद्रष्टा परमेश्वरः स्वमहत्त्वेन तन्मूलं विवृणोति विकासयति सृष्टिरूपे प्रसारयति ॥२॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - What was the basis, what the beginning of the beginning, what sort and whence, from which Vishvakarma, omniscient all watching guardian of the universe, creating the heaven and earth shaped them and vested them with divine grandeur?