पदार्थान्वयभाषाः - [१] (अक्षासः) = ये जुए के पासे (इत्) = निश्चय से (अंकुशिनः) = अंकुशवाले हैं, जैसे अंकुश हाथी को आगे बढ़ने के लिये प्रेरित करता है वैसे ही ये पासे जुवारी को द्यूत सभा की ओर धकेलते हैं । (नितोदिन:) = जैसे एक चाबुक घोड़े को मार्ग पर तेजी से दौड़ने के लिये प्रेरित करता है, उसी प्रकार ये पासे जुवारी को सभास्थल की ओर तेजी से पग उठवाते हैं । [२] (निकृत्वान:) = वहाँ सभास्थल में हारने पर यह जुवारी का कर्तन करनेवाले हैं। (तपनाः) = उसके हृदय को संतप्त करनेवाले हैं। (तायिष्णवः) = इन पासों का स्वभाव ऐसा है कि ये इसके परिवार के अन्य सदस्यों को भी सतत संतप्त करते हैं। [३] (कुमारदेष्णाः) = अन्ततः ये बड़ी बुरी मार को देनेवाले हैं। (जयतः) = जीतते हुए के (पुनः हण:) = फिर मारनेवाले हैं। एक दाव सीधा पड़ा और कुछ जीत हुई, परन्तु अगला ही दाव उलटा पड़ जाता है और फिर हार की हार हो जाती है, सब जीत हार में परिवर्तित हो जाती है । [३] (मध्वा संपृक्ताः) = ऊपर से मधु से सम्पृक्त हैं, बड़े मीठे प्रतीत होते हैं, परन्तु (कितवस्य वर्हणा) = ये पासे जुवारी की जड़ को ही उखाड़ डालनेवाले हैं [बर्हयति = destroy ] । विजय की आशा से ये बड़े मीठे प्रतीत होते हैं, परन्तु पराजय के होने पर ये समूल विनाश कर डालते हैं ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - ये पासे ऊपर से मधुर हैं, परन्तु परिणाम में विनाशकारी हैं।