वांछित मन्त्र चुनें

न मा॑ मिमेथ॒ न जि॑हीळ ए॒षा शि॒वा सखि॑भ्य उ॒त मह्य॑मासीत् । अ॒क्षस्या॒हमे॑कप॒रस्य॑ हे॒तोरनु॑व्रता॒मप॑ जा॒याम॑रोधम् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

na mā mimetha na jihīḻa eṣā śivā sakhibhya uta mahyam āsīt | akṣasyāham ekaparasya hetor anuvratām apa jāyām arodham ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

न । मा॒ । मि॒मे॒थ॒ । न । जि॒ही॒ळे॒ ए॒षा । शि॒वा । सखि॑ऽभ्यः । उ॒त । मह्य॑म् । आ॒सी॒त् । अ॒क्षस्य॑ । अ॒हम् । ए॒क॒ऽप॒रस्य॑ । हे॒तोः । अनु॑ऽव्रताम् । अप॑ । जा॒याम् । अ॒रो॒ध॒म् ॥ १०.३४.२

ऋग्वेद » मण्डल:10» सूक्त:34» मन्त्र:2 | अष्टक:7» अध्याय:8» वर्ग:3» मन्त्र:2 | मण्डल:10» अनुवाक:3» मन्त्र:2


0 बार पढ़ा गया

ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (एषा) यह मेरी पत्नी (मा) मुझे (न मिमेथ) पीड़ा नहीं पहुँचाती-दुःख नहीं देती है (न जिहीळे) न अनादर करती है, तथा (सखिभ्यः-उत मह्यम्) मेरे सहयोगियों के लिये और मेरे लिये (शिवा-आसीत्) कल्याणी है-सुख देनेवाली है, परन्तु खेद है ! (अक्षस्य-एकपरस्य हेतोः) एकमात्र जुए के दोष के कारण (अहम्-अनुव्रतां जायाम्-अप-अरोधम्) मैं अनुकूल आचरण करती हुई पत्नी को न रख सका-नहीं रख सकता, वह मुझसे अलग हो जाती है या मैं स्वयं उसको नहीं रख सकता ॥२॥
भावार्थभाषाः - द्यूतदोष के कारण मनुष्य सुख देनेवाली अनुकूल पत्नी को भी अपने से अलग कर बैठता है ॥२॥
0 बार पढ़ा गया

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

जुए से घर का बिगाड़

पदार्थान्वयभाषाः - [१] द्यूत का व्यसनी पुरुष कहता है कि (एषा) = यह मेरी पत्नी (मा न मिमेथ) = [wrangle, contradict ] मेरा कभी विरोध न करती थी, मेरे साथ कभी इसकी लड़ाई न होती थी। (न जिहीडे) = [neglect] यह मेरी कभी उपेक्षा भी न करती थी । मेरे सुख का पूरा ध्यान करती थी । (सखिभ्यः) = मेरे मित्रों के लिये (उत मह्यम्) = और मेरे लिये यह शिवा कल्याणकर (आसीत्) = थी । आये गये मेरे मित्रों का भी ध्यान करती थी । [२] परन्तु इस जूए ने एक विचित्र - सी परिस्थिति पैदा कर दी। मैंने उस (अनुव्रताम्) = अत्यन्त अनुकूल व्रतोंवाली (जायाम्) = मेरे सन्तानों को जन्म देनेवाली इस पत्नी को (एकपरस्य) = [एकः परः प्रधानं यस्य] इक्का जिसमें प्रधान है उस (अक्षस्य) = पासों से खेले जानेवाले द्यूत के (हेतोः) = कारण से (अप अरोधम्) = अपने से दूर कर दिया। न मैं जुआ खेलता, ना मेरी पत्नी मेरे से दूर होती । जुए के कारण मुझे पत्नी को भी खोना पड़ा, उस पत्नी को जो कि मेरे जीवन के सारे सुख का मूल थी ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- जुए से घर ही बिगड़ जाता है।
0 बार पढ़ा गया

ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (एषा) इयं मे पत्नी (मा) माम् (न मिमेथ) न हिनस्ति-पीडयति (न जिहीळे) नह्यनाद्रियते “हेडृ अनादरे” [भ्वादि०] (सखिभ्यः-उत मह्यम्) सहयोगिभ्योऽपि च मह्यम् (शिवा-आसीत्) कल्याणकरी खल्वस्ति (अक्षस्य-एकपरस्य हेतोः) द्यूतस्यैकमात्रदोषप्रधानस्य हेतोरेव (अहम्-अनुव्रतां जायाम्-अप-अरोधम्) अहमनुकूलमाचरन्तीं पत्नीं नारक्षम् ॥२॥
0 बार पढ़ा गया

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - This gentle lady, my wife, is good to me and to my friends, she never quarrels with me nor does she embarrass or hate me. Alas, for one reason, my persistent addiction to gambling, have I alienated my devoted wife totally dedicated to her life’s duty.