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न॒हि तेषा॑म॒मा च॒न नाध्व॑सु वार॒णेषु॑ । ईशे॑ रि॒पुर॒घशं॑सः ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

nahi teṣām amā cana nādhvasu vāraṇeṣu | īśe ripur aghaśaṁsaḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

न॒हि । तेषा॑म् । अ॒मा । च॒न । न । अध्व॑ऽसु । वा॒र॒णेषु॑ । ईशे॑ । रि॒पुः । अ॒घऽशं॑सः ॥ १०.१८५.२

ऋग्वेद » मण्डल:10» सूक्त:185» मन्त्र:2 | अष्टक:8» अध्याय:8» वर्ग:43» मन्त्र:2 | मण्डल:10» अनुवाक:12» मन्त्र:2


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ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (तेषाम्) उन प्राणादियों के (अमा चन) घर में या सम्पर्क में (नहि) तथा नहि (अध्वसु) मार्गों में (वारणेषु) रोकस्थानों में (अघशंसः) पापेच्छुक-अहितचिन्तक (रिपुः) शत्रु (ईशे) हमें अधिकार में लेने में समर्थ नहीं होता है ॥२॥
भावार्थभाषाः - प्राण, अपान, मुख्यप्राण, अध्यापक, उपदेशक, विद्यासूर्य विद्वान् के घर का सम्पर्क में रहने से अहितचिन्तक रोग या शत्रु मनुष्य पर प्रभावकारी नहीं हो सकता ॥२॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

अघशंस से बचना

पदार्थान्वयभाषाः - [१] गत मन्त्र के अनुसार जिनको 'मित्र, अर्यमा व वरुण' का रक्षण प्राप्त होता है (तेषाम्) = उनका (अघशंसः) = बुराई का शंसन करनेवाला, बुराई को अच्छे रूप में चित्रित करनेवाला, जुए को उदारता व शिकार को एकाग्रता को अभ्यास के रूप में प्रतिपादित करनेवाला (रिपुः) = शत्रु (अमाचन) = घर में भी (नहि ईशे) = ईश नहीं बन पाता। घर में रहता हुआ भी, अत्यन्त अन्तरङ्ग बना हुआ व्यक्ति भी उनको बुराइयों के लिये प्रेरित नहीं कर पाता । [२] (अध्वसु) = मार्गों में अचानक मिल जानेवाला अत्यन्त चतुर भी साथी यात्री (न) = इनको अपने प्रभाव में नहीं ला पाता। [३] (वा) = अथवा (अरणेषु) = [रण शब्दे] अत्यन्त नीरव व निर्जन स्थानों में ले जानेवाला दुष्ट मित्ररूपधारी व्यक्ति भी इसको बहका नहीं पाता।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- 'मित्र, अर्यमा व वरुण' वे रक्षण को प्राप्त करके हम अघशंस व्यक्तियों के बहकावे में आने से बचे रहें ।
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ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (तेषाम्-अमा चन नहि) तेषां मित्रादीनां गृहे “अमा गृहनाम” [निघ० ३।४] तेषां सम्पर्के वा नहि (अध्वसु वारणेषु न) मार्गेषु-वारणेषु वारितप्रदेशेषु न (अघशंसः-रिपुः-ईशे) पापशंसकः-अहितचिन्तकः शत्रुरस्मान्-ईशितुं समर्थो भवितुमर्हति ॥२॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Neither in home nor on the roads under their invincible protection does any enemy or sinner or scandaliser dare to intrude and disturb a dedicated person. (Their rule and protection is complete and inviolable.)