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या दे॒वेषु॑ त॒न्व१॒॑मैर॑यन्त॒ यासां॒ सोमो॒ विश्वा॑ रू॒पाणि॒ वेद॑ । ता अ॒स्मभ्यं॒ पय॑सा॒ पिन्व॑मानाः प्र॒जाव॑तीरिन्द्र गो॒ष्ठे रि॑रीहि ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

yā deveṣu tanvam airayanta yāsāṁ somo viśvā rūpāṇi veda | tā asmabhyam payasā pinvamānāḥ prajāvatīr indra goṣṭhe rirīhi ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

याः । दे॒वेषु॑ । त॒न्व॑म् । ऐर॑यन्त । यासा॑म् । सोमः॑ । विश्वा॑ । रू॒पाणि॑ । वेद॑ । ताः । अ॒स्मभ्य॑म् । पय॑सा । पिन्व॑मानाः । प्र॒जाऽव॑तीः । इ॒न्द्र॒ । गो॒ऽस्थे । रि॒री॒हि॒ ॥ १०.१६९.३

ऋग्वेद » मण्डल:10» सूक्त:169» मन्त्र:3 | अष्टक:8» अध्याय:8» वर्ग:27» मन्त्र:3 | मण्डल:10» अनुवाक:12» मन्त्र:3


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ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (याः) जो गौवें (देवेषु) विद्वानों के निमित्त (तन्वम्) अपने दूध को (ऐरयन्त) प्रेरित करती हैं देती हैं (यासाम्) जिनके (विश्वा रूपाणि) सारे रूपों को (सोमः-वेद) सोमधर्मवाला ब्रह्मचारी जानता है (पयसा) दूध से (अस्मभ्यम्) हमारे लिए-हमें (ताः पिन्वमानाः) वे तृप्त करती हुई-सींचती हुई सदा वर्त्तमान रहें (इन्द्र) हे राजन् ! (प्रजावतीः) इन सन्तानोंवाली गौवों को (गोष्ठे) राजकीय गोरक्षणसदन में (रिरीहि) प्रविष्ट कर-सुरक्षित रख-पालित पोषित कर ॥३॥
भावार्थभाषाः - गौवों का दूध विद्वानों के लिए अत्यन्त हितकर है, सोम्यस्वभाव ब्रह्मचारी दूध पीकर ही अपने को पुष्ट बनाता है, गौवें दूध से सभी को तृप्त करती हैं, इनकी रक्षार्थ राजकीय गोरक्षासदन होने चाहिये ॥३॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

गोदुग्ध से शक्ति विस्तार

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (याः) = जो गौवें (देवेषु) = देववृत्ति के व्यक्तियों में (तन्वम्) - [तन् विस्तारे] शक्ति के विस्तार को (ऐरयन्त) = प्रेरित करती हैं। देव गोदुग्ध का प्रयोग करते हैं और इस प्रयोग से उनकी शक्तियों का विस्तार होता है । [२] (सोमः) = सौम्य वृत्ति का मनुष्य (यासाम्) = जिनके (विश्वा रूपाणि) = सब निरूपणीय पदार्थों को (वेद) = जानता है । 'गो दुग्ध, दही, छाछ, मखन' ये गौ के सात्त्विक पदार्थ हैं। खोया, मिठाइयाँ, पनीर आदि राजस पदार्थ हैं । खट्टी लस्सी आदि तामस पदार्थ हैं। एक सौम्य पुरुष इन सबको जानता है और सात्त्विक पदार्थों का प्रयोग करता है । [३] (ताः) = वे गौवें (पयसा पिन्वमानाः) = अपने दुग्ध से हमें प्रीणित करती हैं। हे (इन्द्र) = परमैश्वर्यवाले प्रभो! आप (प्रजावती:) = उत्कृष्ट बछड़ोंवाली इन गौवों को (गोष्ठे) = हमारी गोशाला में (रिरीहि) = दीजिये । हमारी गोशाला गौवों से पूरी भरी हो, हमें किसी प्रकार भी दूध की कमी न हो।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- गोदुग्ध के सेवन से हमें सब शक्तियों का विस्तार प्राप्त हो ।
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ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (याः देवेषु तन्वम्-ऐरयन्त) याः खलु गावो विद्वत्सु तन्निमित्तं ‘तान्वं ह्रस्वत्वं छान्दसं यद्वा-छान्दसोऽणो लोपः’ तनूभवं दुग्धं प्रेरयन्ति (सोमः यासां विश्वा रूपाणि वेद) सोमधर्मवान् सदाचारी ब्रह्मचारी सर्वाणि रूपाणि जानाति (ताः-अस्मभ्यं पयसा पिन्वमानाः) ता गावोऽस्मभ्यम्-अस्मान् दुग्धेन तर्पयन्त्यः (इन्द्र प्रजावतीः-गोष्ठे-रिरीहि) राजन् ! ताः सन्तानवतीः-गोव्रजे राष्ट्रियगोसदने प्रेरय-प्रवेशय रक्ष च ॥३॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Indra, ruler and controller of life’s development and progress, bring to our dairy farms those cows which produce and yield abundant quality milk for noble and brilliant people, all forms, breeds and qualities, of which creative experts know, which yield more and more milk for our health and growth, and which produce better and better breed of calves.