वांछित मन्त्र चुनें

अ॒हं के॒तुर॒हं मू॒र्धाहमु॒ग्रा वि॒वाच॑नी । ममेदनु॒ क्रतुं॒ पति॑: सेहा॒नाया॑ उ॒पाच॑रेत् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

ahaṁ ketur aham mūrdhāham ugrā vivācanī | mamed anu kratum patiḥ sehānāyā upācaret ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

अ॒हम् । के॒तुः । अ॒हम् । मू॒र्धा । अ॒हम् । उ॒ग्रा । वि॒ऽवाच॑नी । मम॑ । इत् । अनु॑ । क्रतु॑म् । पतिः॑ । से॒हा॒नायाः॑ । उ॒प॒ऽआच॑रेत् ॥ १०.१५९.२

ऋग्वेद » मण्डल:10» सूक्त:159» मन्त्र:2 | अष्टक:8» अध्याय:8» वर्ग:17» मन्त्र:2 | मण्डल:10» अनुवाक:12» मन्त्र:2


0 बार पढ़ा गया

ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (अहं केतुः) मैं घर में गृहज्ञान को चेतानेवाली हूँ (अहं मूर्धा) मैं परिवार में मूर्धा के समान मान्य हूँ (अहम्-उग्रा विवाचनी) मैं तेजस्वी तथा विशिष्ट मधुरभाषिणी हूँ (मम सेहानायाः-इत्) मुझ सहनशीला के ही (अनुक्रतुं पतिः-उपाचरेत्) संकल्प के अनुसार पति व्यवहार करता है ॥२॥
भावार्थभाषाः - विदुषी गुणवती स्त्री को अपनी विद्वत्ता और गुणवत्ता पर विश्वास या गर्व होना चाहिए, घर में सब मेरे संकेत पर चलते हैं, पति भी मेरे संकल्प के अनुसार व्यवहार करता है, ऐसे कहनेवाली नारी सौभाग्यशालिनी है ॥२॥
0 बार पढ़ा गया

हरिशरण सिद्धान्तालंकार

आदर्श माता

पदार्थान्वयभाषाः - [१] माता कहती है कि (अहं केतुः) = मैं ज्ञानवाली बनती हूँ। (अहं मूर्धा) = मैं अपने क्षेत्र में शिखर [top most ] घर पहुँचने का प्रयत्न करती हूँ। (अहं उग्रा) = मैं तेजस्विनी बनती हूँ । (विवाचनी) = प्रभु के नामों का विशेषरूप से उच्चारण करनेवाली होती हूँ। मस्तिष्क में ज्ञान, मन में शिखर पर पहुँचने की भावनावाली तथा शरीर में तेजवाली, प्रभु के नाम का सदा जप करनेवाली माता ही आदर्श है । [२] (सेहानायाः) = काम-क्रोध आदि शत्रुओं का पराभव करनेवाली (मम) = मेरे (क्रतुं अनु) = संकल्प के अनुसार (इत्) = ही (पतिः) = मेरे पति उपाचरेत् कार्यों को करनेवाले हों। पत्नी तेजस्विनी व शान्त स्वभाववाली हो, क्रोध आदि से सदा दूर हो। इसके विचारों के अनुसार ही पति कार्यों को करते हैं । इस प्रकार पति-पत्नी का समन्वय होने पर ही उत्तम सन्तान हुआ करते हैं।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- आदर्श माता में 'ज्ञान- शिखर पर पहुँचने की भावना, तेज व प्रभु स्मरण की वृत्ति' होनी चाहिये। इस पत्नी को पति की अनुकूलता प्राप्त होती है और ये उत्तम सन्तानों को प्राप्त करते हैं ।
0 बार पढ़ा गया

ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (अहं केतुः) गृहेऽहं केतयित्री गृहज्ञानस्य सूचयित्री (अहं मूर्धा) अहं परिवारे मूर्धा, मूर्धेव मान्याऽस्मि (अहम्-उग्रा विवाचनी) अहं तेजस्विनी तथा विशिष्टमधुरभाषिणी (मम सेहानायाः-इत्-अनुक्रतुं पतिः-उपाचरेत्) मम सहनशीलायाः साफल्यमनु खल्वेव पतिः-उपाचरति ॥२॥
0 बार पढ़ा गया

डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - I am my own refulgence, I am the one on top, I am the passion and the fire. I speak and I must have the response. I am the challenger, my master would surely know my acts and intentions positively and would respond favourably.