चक्षु॑र्नो धेहि॒ चक्षु॑षे॒ चक्षु॑र्वि॒ख्यै त॒नूभ्य॑: । सं चे॒दं वि च॑ पश्येम ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
cakṣur no dhehi cakṣuṣe cakṣur vikhyai tanūbhyaḥ | saṁ cedaṁ vi ca paśyema ||
पद पाठ
चक्षुः॑ । नः॒ । धे॒हि॒ । चक्षु॑षे । चक्षुः॑ । वि॒ऽख्यै । त॒नूभ्यः॑ । सम् । च॒ । इ॒दम् । वि । च॒ । प॒श्ये॒म॒ ॥ १०.१५८.४
ऋग्वेद » मण्डल:10» सूक्त:158» मन्त्र:4
| अष्टक:8» अध्याय:8» वर्ग:16» मन्त्र:4
| मण्डल:10» अनुवाक:12» मन्त्र:4
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ब्रह्ममुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (नः चक्षुषे) मेरी आँख के लिये (चक्षुः-धेहिः) दर्शनशक्ति धारण करा (तनूभ्यः-विख्यै) मेरी तनुसम्बन्धी प्राणियों के विशिष्ट दर्शनसाधन के लिये दर्शनशक्ति धारण करा (इदं संपश्येम च विपश्येम च) सब सम्यक् देखें, विशिष्ट देखें ॥४॥
भावार्थभाषाः - मानव की आँख में दर्शनशक्ति रहे तथा अन्यों के नेत्रों में भी दर्शनशक्ति रहे, पास भी देखें-दूर भी देखें ॥४॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
सन्दर्शन- विदर्शन
पदार्थान्वयभाषाः - [१] (नः) = हमारी (चक्षुषे) = आँख के लिये (चक्षुः धेहि) = प्रकाशक तेज को धारण कीजिये । (विख्यै) = विशेषरूप से प्रकाशन के लिये और (तनूभ्यः) = हमारे शरीरों की शक्ति के विस्तार के लिये (चक्षुः) = प्रकाशक तेज को धारण करिये। [२] हमें वह दृष्टिशक्ति दीजिये जिससे हम (इदम्) = इस जगत् को (संपश्येम) = समुदित रूप में देख सकें, (च) = और (विपश्येम) = इसके अंगों को अलग-अलग भी अच्छी प्रकार देख सकें। हमारा 'सन्दर्शन व विदर्शन' बड़ा ठीक प्रकार से चले ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हम प्रकाशक तेज को प्राप्त करके अपनी आँखों से इस संसार को समष्टि व व्यष्टि के रूप में सम्यक् देखनेवाले हों। हम समाज व व्यक्ति दोनों का ध्यान करनेवाले हों। जहाँ लोकहित में प्रवृत्त हों वहां अपना धारण भी ठीक प्रकार से करें ।
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ब्रह्ममुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (नः-चक्षुषे-चक्षुः-धेहि) परमात्मन् मम “व्यत्ययेन बहुवचनम्” नेत्राय दर्शनशक्तिं धारय (तनूभ्यः-विख्यै चक्षुः) मम तनुसम्बन्धिभ्यो विशिष्टदर्शनसाधनाय नेत्राय दर्शनशक्तिं धारय (इदं संपश्येम च विपश्येम च) वयं सर्वे सम्यक् पश्येम च विशिष्टं पश्येम च ॥४॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Give us the light for vision outer and inner, give us the light to see the past and future for ourselves and our children, give us the vision to see this life and the world as a whole as well as in parts integrated in the essence.
