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यया॒ गा आ॒करा॑महे॒ सेन॑याग्ने॒ तवो॒त्या । तां नो॑ हिन्व म॒घत्त॑ये ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

yayā gā ākarāmahe senayāgne tavotyā | tāṁ no hinva maghattaye ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

यया॑ । गाः । आ॒ऽकरा॑महे । सेन॑या । अ॒ग्ने॒ । तव॑ । ऊ॒त्या । ताम् । नः॒ । हि॒न्व॒ । म॒घत्त॑ये ॥ १०.१५६.२

ऋग्वेद » मण्डल:10» सूक्त:156» मन्त्र:2 | अष्टक:8» अध्याय:8» वर्ग:14» मन्त्र:2 | मण्डल:10» अनुवाक:12» मन्त्र:2


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ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (अग्ने) हे अग्रणेत: ! राजन् ! (तव) तेरी (यया-ऊत्या सेनया) जिस रक्षिका सेना के साथ (गाः) शत्रु की भूमियों भूभागों को (आकरामहे) अपने अधिकार में लेते हैं (ताम्) उस सेना को (नः) हमारे (मघत्तये) धनप्राप्ति के लिये (हिन्व) प्रेरित कर ॥२॥
भावार्थभाषाः - जिस सेना के द्वारा शत्रु की भूमियों-भूभागों को जीता जाये, उनसे लाभ लेने के लिए सेना उसको सँभाले-रक्षा करे ॥२॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

गो-रक्षण

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (अग्ने) = परमात्मन् ! (यया) = जिस (सेनया) = [इनेन सह ] स्वामी के साथ वर्तमान आपकी (उत्था) = रक्षण शक्ति से हम (गाः) = इन सब इन्द्रियों व ज्ञान की वाणियों का (आकरामहे) = सम्पादन करते हैं, (ताम्) = उस रक्षण को (मघत्तये) = ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिये (नः) = हमें (हिन्व) = प्राप्त कराइये । [२] प्रभु के रक्षण से ही सब ऐश्वर्य प्राप्त होते हैं। प्रभु का रक्षण हमें प्राप्त हो, हम प्रभु को कभी भूले नहीं । यही रक्षण का 'स्वामी के साथ' होना है। यह रक्षण ही हमें इन्द्रियों को विषयों का शिकार होने से बचाने में समर्थ करता है । इन्द्रियों को सुरक्षित रखकर ही हम वास्तविक ऐश्वर्य का सम्पादन कर पाते हैं । 1
भावार्थभाषाः - भावार्थ - प्रभु के रक्षण में हम इन्द्रियों को सुरक्षित रखते हुए ज्ञानैश्वर्य का सम्पादन करनेवाले हों ।
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ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (अग्ने) हे अग्रणेतः ! राजन् ! (तव यया-ऊत्या सेनया) तव यया रक्षिकया सेनया (गाः-आकरामहे) भूमीः-भूभागान्-आत्मीयान् कुर्मः (तां न मघत्तये-हिन्व) तां रक्षिकां सेनामस्माकं धनप्राप्तये प्रेरय ॥२॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - O leading light of life, energy of fire, with your powers and means of protection by which we acquire our lands and develop our fields and cattle wealth, pray enhance and accelerate that same power for us for acquisition of wealth, power and honour.