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ये युध्य॑न्ते प्र॒धने॑षु॒ शूरा॑सो॒ ये त॑नू॒त्यज॑: । ये वा॑ स॒हस्र॑दक्षिणा॒स्ताँश्चि॑दे॒वापि॑ गच्छतात् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

ye yudhyante pradhaneṣu śūrāso ye tanūtyajaḥ | ye vā sahasradakṣiṇās tām̐ś cid evāpi gacchatāt ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

ये । युध्य॑न्ते । प्र॒ऽधने॑षु । शूरा॑सः । ये । त॒नू॒ऽत्यजः॑ । ये । वा॒ । स॒हस्र॑ऽदक्षिणाः । तान् । चि॒त् । ए॒व । अपि॑ । ग॒च्छ॒ता॒त् ॥ १०.१५४.३

ऋग्वेद » मण्डल:10» सूक्त:154» मन्त्र:3 | अष्टक:8» अध्याय:8» वर्ग:12» मन्त्र:3 | मण्डल:10» अनुवाक:12» मन्त्र:3


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ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (ये शूरासः) जो शूरवीर हैं (ये तनूत्यजः) जो शरीरत्यागी हैं (प्रधनेषु युध्यन्ते) संग्रामों में युद्ध करते हैं, वे क्षत्रिय (ये वा) और जो (सहस्रदक्षिणाः) बहुत दक्षिणा देनेवाले-गौदक्षिणा देनेवाले वैश्य हैं, (तान् चित्-एव) उनको भी (अपि गच्छतात्) प्राप्त हो ॥३॥
भावार्थभाषाः - ब्रह्मचारी चाहे तो युद्ध में लड़नेवाले अपने को राष्ट्र के लिए समर्पित करनेवाले क्षत्रियों को प्राप्त हो या बहुत दक्षिणा देनेवाले वैश्यों को प्राप्त हो ॥३॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

वीर व दानवीर

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (ये) = जो (प्रधनेषु) = संग्रामों में (युध्यन्ते) = युद्ध करते हैं । (शूरासः) = शूरवीर होते हुए (ये) = जो (तनूत्यज:) = अपने शरीरों को छोड़ने के लिये तैयार हैं, जिनको जीवन की समता ने कायर नहीं बना दिया। (वा) = अथवा (ये) = जो (सहस्रदक्षिणाः) = हजारों के ही दान देनेवाले हैं 'शतहस्त समाहर सहस्रहस्त संकिर'=खूब कमाते हैं और खूब ही देते हैं । [२] यह हमारे समीप आया हुआ बालक (चित्) = निश्चय से (तान् एव) = उन लोगों की ही (अपिगच्छतात्) = ओर जानेवाला हो। यह भी वीर क्षत्रिय बने, युद्ध से पराङ्मुख होनेवाला न हो। तथा यह भी दानवीर बने। यह धन के प्रति आसक्तिवाला न बन जाये।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- हमारे सन्तान वीर क्षत्रिय बनें। अथवा वे दानवीर वैश्य बन पायें |
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ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (ये शूरासः) ये शूराः क्षत्रियाः (ये तनूत्यजः) ये शरीर-त्यागिनः (प्रधनेषु युध्यन्ते) संग्रामेषु प्रधने संग्रामनाम [निघ० २।१७] युद्धं कुर्वन्ति (ये वा) ये च (सहस्रदक्षिणाः) गोधनदक्षिणादातारो वैश्याः (तान् चित्-एव) तानपि-हि (अपि गच्छतात्) क्षत्रियत्वं वैश्यत्वञ्च ग्रहीतुं खलु गच्छ-प्राप्तो भव ॥३॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - There are the brave who fight to the end in battles, who give up the body, and those who give in charity a thousand ways. The spirit of life flows to them also, universally.