त्वमि॑न्द्र॒ बला॒दधि॒ सह॑सो जा॒त ओज॑सः । त्वं वृ॑ष॒न्वृषेद॑सि ॥
अंग्रेज़ी लिप्यंतरण
मन्त्र उच्चारण
tvam indra balād adhi sahaso jāta ojasaḥ | tvaṁ vṛṣan vṛṣed asi ||
पद पाठ
त्वम् । इ॒न्द्र॒ । बला॑त् । अधि॑ । सह॑सः । जा॒तः । ओज॑सः । त्वम् । वृ॒ष॒न् । वृषा॑ । इत् । अ॒सि॒ ॥ १०.१५३.२
ऋग्वेद » मण्डल:10» सूक्त:153» मन्त्र:2
| अष्टक:8» अध्याय:8» वर्ग:11» मन्त्र:2
| मण्डल:10» अनुवाक:12» मन्त्र:2
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ब्रह्ममुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (इन्द्र) हे परमात्मन् ! या राजन् ! (त्वम्) तू (बलात्) बाह्यबल से (सहसः) मनोबल से-साहस से (ओजसः) आत्मबल से (अधिजातः) अध्यक्षता के लिए प्रसिद्ध है (वृषन्) हे बलवान् ! (वृषा-इत्-असि) तू सुखवर्षक ही है ॥२॥
भावार्थभाषाः - परमात्मा सभी बलों से युक्त है, कर्माध्यक्षता में प्रसिद्ध सदा सुखवर्षक है, इसी प्रकार राजा को समस्त बलों से युक्त होना चाहिये और प्रजा के लिये सुखवर्षक होना चाहिये ॥२॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार
बालक को माता की प्रेरणा
पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे (इन्द्र) = इन्द्रियों के अधिष्ठाता बननेवाले प्रिय ! (त्वम्) = तू (बलात्) = बल से, (सहसः) = सहस् से, सहनशक्तिवाले बल से तथा (ओजस:) = ओज से (अधि जातः असि) = आधिक्येन प्रसिद्ध हुआ है। तेरा मनोमयकोश 'बल व ओज' से सम्पन्न है तथा आनन्दमयकोश 'सहस्' वाला हुआ है । [२] हे (वृषन्) = शक्तिशाली इन्द्र ! (त्वम्) = तू (इत्) = निश्चय से (वृष) = शक्तिशाली (असि) = है | तूने अपने को शक्ति से सिक्त करना है ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - माता प्रारम्भ से बालक को यही प्रेरणा देती है कि तूने 'बलवान्, ओजस्वी व सहस्वी' बनना है। तू शक्तिशाली है ।
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ब्रह्ममुनि
पदार्थान्वयभाषाः - (इन्द्र त्वम्) हे परमात्मन् ! राजन् वा ! त्वम् (बलात्) बाह्यबलात् (सहसः) मानसबलात्-साहसात् (ओजसः) आत्मिकबलात् (अधिजातः) अध्यक्षत्वे प्रसिद्धः (वृषन् वृषा-इत्-असि) हे बलवन् ! सुखवर्षक एवासि ॥२॥
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डॉ. तुलसी राम
पदार्थान्वयभाषाः - Ruling power, Indra, you have risen high by virtue of your strength, patient courage, and grandeur of personality. Generous as showers of blissful rain, you are mighty, excellent and refulgent as the sun.
