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घृषु॑: श्ये॒नाय॒ कृत्व॑न आ॒सु स्वासु॒ वंस॑गः । अव॑ दीधेदही॒शुव॑: ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

ghṛṣuḥ śyenāya kṛtvana āsu svāsu vaṁsagaḥ | ava dīdhed ahīśuvaḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

घृषुः॑ । श्ये॒नाय॑ । कृत्व॑ने । आ॒सु । स्वासु॑ । वंस॑गः । अव॑ । दी॒धे॒त् । अ॒ही॒शुवः॑ ॥ १०.१४४.३

ऋग्वेद » मण्डल:10» सूक्त:144» मन्त्र:3 | अष्टक:8» अध्याय:8» वर्ग:2» मन्त्र:3 | मण्डल:10» अनुवाक:11» मन्त्र:3


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ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (कृत्वने) कर्त्तव्यपरायण (श्येनाय) प्रशंसनीय गतिवाले आत्मा के लिये (घृषुः) घर्षक-पराक्रमप्रद (वंसगः) वननीय गतिवाला वीर्य-ब्रह्मचर्य पदार्थ (आसु स्वासु) इन स्वकीय शरीरनाड़ियों में (अहीशुवः) निरन्तर व्यापनेवाले प्राणों को (अव दीधेत्) दीप्त करता है-बल देता है ॥३॥
भावार्थभाषाः - ब्रह्मचर्य मनुष्य को कर्मठ पराक्रमी श्रेष्ठ व्यवहारवाला बनाता है, शरीर की नाड़ियों में प्राणों को उत्तेजित करता है, बल देता है ॥३॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

सोमरक्षण-शक्ति-गति-दीप्ति

पदार्थान्वयभाषाः - [१] गत मन्त्र में वर्णित सोम (श्येनाय) = [ श्यैङ् गतौ ] गतिशील पुरुष के लिये (कृत्वने) = अपने कर्त्तव्यों का पालन करनेवाले के लिये (धृषुः) = शत्रुओं का धर्षण करनेवाला होता है । शत्रुओं का नाश हो जाने पर आसु इन (स्वासु) = अपनी प्रजाओं में (वंसगः) = यह सोम वननीय [सुन्दर] गतिवाला होता है। जीवन की सब गतियों में यह सौन्दर्य को लानेवाला होता है । [२] (अहीशुवः) = इन अहीन गतिवालों को यह सोम (अवदीधेत्) = दीप्त कर देता है । सोमरक्षण से मनुष्य शक्ति-सम्पन्न क्रियाशील होता है और यह क्रियाशीलता इसे दीप्त बना देती है। सूर्य क्रियाशीलता के कारण ही तो चमकता है। एवं क्रम यह है - [क] सोम का रक्षण, [ख] शक्ति की उत्पत्ति, [ग] क्रियाशीलता, [घ] दीप्ति ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ- सोमरक्षण से शक्ति प्राप्त होती है। शक्ति से जीवन सुन्दर गतिवाला होता है। इस सुन्दर गति से जीवन चमक उठता है ।
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ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (कृत्वने श्येनाय) कर्त्तव्यपरायणाय “कृ धातोः” “अन्येभ्योऽपि दृश्यन्ते” [अष्टा० ३।२।७५] इति क्वनिप् प्रत्ययः, प्रशंसनीयगतिकायात्मने “श्येनः शंसनीयं गच्छति” [निरु० ४।२४] (घृषुः) घर्षयिता पराक्रमप्रदः (वंसगः) वननीयगमनः-इन्दुः-रेतः पदार्थः (आसु स्वासु) एतासु स्वकीयनाडीषु (अहीशुवः) निरन्तरं व्यापनशीलान् प्राणान् (अव दीधेत्) दीपयति ॥३॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Effulgent, agile and exhilarating for the dynamic creative personality, inspiring and vitalising among its own people, it blesses them and their progeny with high energy and enthusiasm.