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त्वया॑ व॒यं शा॑शद्महे॒ रणे॑षु प्र॒पश्य॑न्तो यु॒धेन्या॑नि॒ भूरि॑ । चो॒दया॑मि त॒ आयु॑धा॒ वचो॑भि॒: सं ते॑ शिशामि॒ ब्रह्म॑णा॒ वयां॑सि ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

tvayā vayaṁ śāśadmahe raṇeṣu prapaśyanto yudhenyāni bhūri | codayāmi ta āyudhā vacobhiḥ saṁ te śiśāmi brahmaṇā vayāṁsi ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

त्वया॑ । व॒यम् । शा॒श॒द्म॒हे॒ । रणे॑षु । प्र॒ऽपश्य॑न्तः । यु॒धेन्या॑नि । भूरि॑ । चो॒दया॑मि । ते॒ । आयु॑धा । वचः॑ऽभिः । सम् । ते॒ । शि॒शा॒मि॒ । ब्रह्म॑णा । वयां॑सि ॥ १०.१२०.५

ऋग्वेद » मण्डल:10» सूक्त:120» मन्त्र:5 | अष्टक:8» अध्याय:7» वर्ग:1» मन्त्र:5 | मण्डल:10» अनुवाक:10» मन्त्र:5


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ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (त्वया) तेरी सहायता से (वयं) हम (युद्धेषु) युद्धों में शत्रुओं को (शाशद्महे) नष्ट करें (युधेन्यानि) युद्ध करने योग्य शास्त्रों को (प्रपश्यन्तः) प्रकृष्टरूप से जानते हुए (ते वचोभिः) तेरे आदेशों से (आयुधानि) शास्त्रों को (प्रेरयामि) फेंकता हूँ (ते ब्रह्मणा) तेरे ब्रह्मास्त्र से (वयांसि) बाणफलकों को (सं शिशामि) तीक्ष्ण करता हूँ ॥५॥
भावार्थभाषाः - जितना भी कोई शस्त्रचालक हो, उसे परमात्मा के सहाय्य से युद्ध में शस्त्र चलाकर शत्रु पर जय पाने की प्रार्थना करनी चाहिये। अपने शस्त्रों को तीक्ष्ण बनाना, विजय पाना चाहिये ॥५॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

की उपासना द्वारा शत्रु विजय प्रभु

पदार्थान्वयभाषाः - [१] हे प्रभो ! (रणेषु) = संग्रामों में (वयम्) = हम (त्वया) = आपके साथ (प्रपश्यन्तः) = अच्छी प्रकार से देखते हुए, ज्ञान को प्राप्त करते हुए (युधेन्यानि) = युद्ध करने योग्य, 'काम, क्रोध, लोभ' आदि असुरों को (भूरि) = खूब ही (शाशद् महे) = नष्ट करनेवाले हों। हमारे अन्दर छिपकर रहनेवाले काम, क्रोध आदि शत्रुओं को हम अवश्य विनष्ट करनेवाले हों। [२] (ते) = आप से दिये हुए (आयुधा) = इन्द्रिय, मन, बुद्धि रूप अस्त्रों को (वचोभिः) = आपके वेद में दिये गये निर्देशों के अनुसार (चोदयामि) = प्रेरित करता हूँ। (ते ब्रह्मणा) - आपके इस वेदज्ञान से व स्तवन से वयांसि मैं अपने जीवनों को (सं शिशामि) = [ शो तनूकरणे] तीव्र करता हूँ। मेरा जीवन तीव्र बुद्धिवाला बनता है, और इस प्रकार मैं वासनारूप शत्रुओं का विनाश करनेवाला होता हूँ ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - प्रभु से मिलकर हम वासनारूप शत्रुओं को युद्ध में पराजित करें। इन्द्रिय, मन व बुद्धि रूप अस्त्रों को तीव्र करें।
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ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (त्वया वयं रणेषु शाशद्महे) त्वया त्वत्सहायतया वयं युद्धेषु शत्रून् शातयामो नाशयामः (युधेन्यानि भूरि प्रपश्यन्तः) योधनार्हाणि शस्त्राणि बहूनि प्रकृष्टं जानन्तः (ते वचोभिः) तवादेशैः (आयुधानि-प्रेरयामि) शस्त्राणि प्रक्षिपामि (ते ब्रह्मणा) तव ब्रह्मास्त्रेण (वयांसि सं शिशामि) बाणफलकानि तीक्ष्णीकरोमि ॥५॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - With your divine inspiration, well knowing the weapons of war, we fight out the enemies of life in the battles of humanity. I strengthen and calibrate the arms and ammunitions for battle by your divine words, and by the same divine formula I sharpen the target efficacy of the arrows and missiles of defence and offence.