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अप॒ योरिन्द्र॒: पाप॑ज॒ आ मर्तो॒ न श॑श्रमा॒णो बि॑भी॒वान् । शु॒भे यद्यु॑यु॒जे तवि॑षीवान् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

apa yor indraḥ pāpaja ā marto na śaśramāṇo bibhīvān | śubhe yad yuyuje taviṣīvān ||

पद पाठ

अप॑ । योः । इन्द्रः॑ । पाप॑जे । आ । मर्तः॑ । न । श॒श्र॒मा॒णः । बि॒भी॒वान् । शु॒भे । यत् । यु॒यु॒जे । तवि॑षीऽवान् ॥ १०.१०५.३

ऋग्वेद » मण्डल:10» सूक्त:105» मन्त्र:3 | अष्टक:8» अध्याय:5» वर्ग:26» मन्त्र:3 | मण्डल:10» अनुवाक:9» मन्त्र:3


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ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (इन्द्रः) ऐश्वर्यवान् परमात्मा (पापजे) पापकर्म से प्रसिद्ध पापीजन के निमित्त (आशश्रमाणः) बहुत श्रम करते हुए क्रोध में आये हुए (मर्त्तः न) जन की भाँति (विभीवान्) विशेष भीतिवाला-भय देनेवाला (अपयोः) अपकारक-हानिकारक हो जाता है (यत्) यतः-जिससे कि वह (शुभे) शुभकर्म करनेवाले के लिये बल देनेवाला होता हुआ उसके साथ युक्त होता है ॥३॥
भावार्थभाषाः - परमात्मा पापी जन के लिए क्रोध करता हुआ भय देनेवाला हानिकारक होता है, शुभ कर्मकर्ता के लिये बल देता और उसके साथ योग करता है ॥३॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

'इन्द्र' का लक्षण = ऋषभः ॥

पदार्थान्वयभाषाः - [१] (इन्द्रः) = एक जितेन्द्रिय पुरुष पापजे पाप से उत्पन्न धन के विषय में (अपयोः) = [अपयोजिता] अपने को पृथक् करनेवाला होता है। यह (मर्तः न) = युद्ध में प्राणों को त्यागनेवाले पुरुष के समान (आ शश्रमाणः) = खूब ही श्रम करनेवाला होता है। (बिभीवान्) = पापकर्म से सदा डरनेवाला होता है। अथवा प्रभु के भय वाला होता है । [२] (यत्) = क्योंकि (शुभे) = शुभ कर्मों में ही युयुजे युक्त होता है, इसलिए (तविषीवान्) = बलवाला होता है।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - जितेन्द्रिय पुरुष [क] पापज धन से अपने को पृथक् रखता है, [ख] श्रमशील होता है, [ग] प्रभु के भय में चलता है, [घ] शुभ कर्मों में व्यापृत होता है, [ङ] शक्तिशाली बनता है ।
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ब्रह्ममुनि

पदार्थान्वयभाषाः - (इन्द्रः) ऐश्वर्यवान् (पापजे) पापात् कर्मणो यो जातः प्रसिद्धः पापीजनस्तन्निमित्तम् “निमित्तसप्तमी” (आशश्रमाणः-मर्त्तः-न) समन्ताच्छ्राम्यन् क्रुध्यन् जन इव (विभीवान्) विशेषेण भीतिमान्-भीतेः कारणं भवतीत्यर्थः (अपयोः) अपयोक्ताऽपकारको भवति युजधातोर्डसि प्रत्यय औणादिको बाहुलकात् (यत्-शुभे तविषीवान् युयुजे) यतः शुभकर्मकर्त्रे बलवान्-बलं प्रयच्छन् सन् युङ्क्ते तेन सह योगं करोति ॥३॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Repeller is Indra for the man of sin, fearsome like a person sitting in judgement for punishment, but for the man dedicated to good and joined to the divine spirit, he is the giver of light and power.