अ॒स्मान्त्सु तत्र॑ चोद॒येन्द्र॑ रा॒ये रभ॑स्वतः। तुवि॑द्युम्न॒ यश॑स्वतः॥
asmān su tatra codayendra rāye rabhasvataḥ | tuvidyumna yaśasvataḥ ||
अ॒स्मान्। सु। तत्र॑। चो॒द॒य॒। इन्द्र॑। रा॒ये। रभ॑स्वतः। तुवि॑ऽद्युम्न। यश॑स्वतः॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
अन्तर्यामी ईश्वर हम लोगों को कैसे-कैसे कामों में प्रेरणा करे, इस विषय का अगले मन्त्र में प्रकाश किया है-
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
रभस्वान् - यशस्वान्
स्वामी दयानन्द सरस्वती
कथंभूतानस्मान्कुर्वित्युपदिश्यते।
हे तुविद्युम्नेन्द्र परात्मँस्त्वं रभस्वतो यशस्वतोऽस्मान् तत्र पुरुषार्थे राये उत्कृष्टधनप्राप्त्यर्थे सुचोदय ॥६॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
O God Innermost Soul of our soul, O most splendid Lord of the manifold wealth of infinite wisdom, stimulate us who are industrious and glorious, for the acquirement of sublime wealth (internal as well external, spiritual and material).
