स॒मो॒हे वा॒ य आश॑त॒ नर॑स्तो॒कस्य॒ सनि॑तौ। विप्रा॑सो वा धिया॒यवः॑॥
samohe vā ya āśata naras tokasya sanitau | viprāso vā dhiyāyavaḥ ||
स॒म्ऽओ॒हे। वा॒। ये। आश॑त। नरः॑। तो॒कस्य॑। सनि॑तौ। विप्रा॑सः। वा॒। धि॒या॒ऽयवः॑॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
मनुष्यों को कैसे होकर युद्ध करना चाहिये, यह विषय अगले मन्त्र में प्रकाश किया है-
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
धनप्राप्ति व बुद्धिवर्धन के संग्राम में विजय
स्वामी दयानन्द सरस्वती
मनुष्यैः कीदृशा भूत्वा युद्धं कर्त्तव्यमित्युपदिश्यते।
ये विप्रासो नरस्ते समोहे शत्रूनाशत वा ये धियायवस्ते तोकस्य सनितावाशत ॥६॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
How should men fight is taught in the sixth mantra.
The heroes should engage themselves in battles with unrighteous foes and persons endowed with genius and desirous of acquiring and spreading special or scientific knowledge, should train children.
