इन्द्रं॑ वो वि॒श्वत॒स्परि॒ हवा॑महे॒ जने॑भ्यः। अ॒स्माक॑मस्तु॒ केव॑लः॥
indraṁ vo viśvatas pari havāmahe janebhyaḥ | asmākam astu kevalaḥ ||
इन्द्र॑म्। वः॒। वि॒श्वतः॑। परि॑। हवा॑महे। जने॑भ्यः। अ॒स्माक॑म्। अ॒स्तु॒। केव॑लः॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
उक्त परमेश्वर सर्वोपरि विराजमान है, इस विषय का प्रकाश अगले मन्त्र में किया है-
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
प्रभु ही हमारे एकमात्र मित्र हों , 'असाधारण मित्र'
स्वामी दयानन्द सरस्वती
अयमेव सर्वोपरि वर्त्तत इत्युपदिश्यते।
हे मनुष्या ! यं वयं विश्वतो जनेभ्यः सर्वगुणैरुत्कृष्टमिन्द्रं परमेश्वरं परि हवामहे, स एव वो युष्माकमस्माकं च केवलः पूज्य इष्टोऽस्तु॥१०॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
This God is the Best and the Lord of all is taught in the tenth Mantra.
O friends! We worship God for the welfare of you and all other people. May He be the only object of our worship and desire, as He is superior to all and the Best.
