होता॒ निष॑त्तो॒ मनो॒रप॑त्ये॒ स चि॒न्न्वा॑सां॒ पती॑ रयी॒णाम् ॥
hotā niṣatto manor apatye sa cin nv āsām patī rayīṇām ||
होता॑। निऽस॑त्तः। मनोः॑। अप॑त्ये। सः। चि॒त्। नु। आ॒सा॒म्। पतिः॑। र॒यी॒णाम् ॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
फिर अध्यापक और शिष्य कैसे हों, यह विषय अगले मन्त्र में कहा है ॥
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
ज्ञानी में प्रभु का निवास
स्वामी दयानन्द सरस्वती
पुनस्तौ कीदृशावित्युपदिश्यते ॥
यो निषत्तो मनोरपत्ये रयीणां होताऽस्ति स आसां प्रज्ञानां पतिर्भवेत्। हे अमूराः ! स्वैर्दक्षैर्गुणैः सह तनूषु वर्त्तमानाः सन्तो मिथो रेतो विस्तारयन्तो भवन्त एतं समिच्छन्त चिदपि सर्वा विद्या यूयं नु जानत ॥ ४ ॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
The same subject is continued.
He should be the Lord of these subjects or people who is engaged in all good works and everywhere the giver of wealth of various kinds to the children of wise learned men. O learned persons, endowed with knowledge. good education, dexterity and other virtues and desiring protective vigour in your own excellent off-spring wish well of him. Learn all sciences.
