स॒नाद्दिवं॒ परि॒ भूमा॒ विरू॑पे पुन॒र्भुवा॑ युव॒ती स्वेभि॒रेवैः॑। कृ॒ष्णेभि॑र॒क्तोषा रुश॑द्भि॒र्वपु॑र्भि॒रा च॑रतो अ॒न्यान्या॑ ॥
sanād divam pari bhūmā virūpe punarbhuvā yuvatī svebhir evaiḥ | kṛṣṇebhir aktoṣā ruśadbhir vapurbhir ā carato anyānyā ||
स॒नात्। दिव॑म्। परि॑। भूम॑। विरू॑पे॒ इति॒ विऽरू॑पे। पु॒नः॒ऽभुवा॑। यु॒व॒ती इति॑। स्वेभिः॑। एवैः॑। कृ॒ष्णेभिः॑। अ॒क्ता। उ॒षाः। रुश॑त्ऽभिः। वपुः॑ऽभिः। आ। च॒र॒तः॒। अ॒न्याऽअ॑न्या ॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
अब रात्रि और दिन के दृष्टान्त से स्त्री और पुरुष किस-किस प्रकार वर्त्तमान करें, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है ॥
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
दिन - रात का चक्र
स्वामी दयानन्द सरस्वती
अथ रात्रिदिवसदृष्टान्तेन स्त्रीपुरुषौ कथं वर्त्तेयातामित्युपदिश्यते ॥
हे स्त्रीपुरुषौ ! युवां यथा सनाद्दिवं भूमा प्राप्य पुनर्भुवा युवती इव विरूपे अक्तोषाः स्वेभीरुशद्भिर्वपुभिः कृष्णेभिरेवैः सहान्यान्या पर्य्याचरतस्तथा स्वयंवरविधानेन विवाहं कृत्वा परस्परौ प्रीतिमन्तौ भूत्वा सततमानन्देतम् ॥ ८ ॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
How should husband and wife behave is taught by the illustration of day and night.
O men and women, as night and dawn of various complexion, repeatedly born, but ever youthful, traverse in their revolutions alternately, from a remote period, earth and heaven, night with her dark, dawn with her luminous limbs, so you should marry each other according to your deliberate choice made of your own accord and enjoy happiness, loving mutually with legitimate attractions.
