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सु॒दासे॑ दस्रा॒ वसु॒ बिभ्र॑ता॒ रथे॒ पृक्षो॑ वहतमश्विना । र॒यिं स॑मु॒द्रादु॒त वा॑ दि॒वस्पर्य॒स्मे ध॑त्तं पुरु॒स्पृह॑म् ॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

sudāse dasrā vasu bibhratā rathe pṛkṣo vahatam aśvinā | rayiṁ samudrād uta vā divas pary asme dhattam puruspṛham ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

सु॒दासे॑ । द॒स्रा॒ । वसु॑ । बिभ्र॑ता । रथे॑ । पृक्षः॑ । व॒ह॒त॒म् । अ॒श्वि॒ना॒ । र॒यिम् । स॒मु॒द्रात् । उ॒त । वा॒ । दि॒वः । परि॑ । अ॒स्मे इति॑ । ध॒त्त॒म् । पु॒रु॒स्पृह॑म्॥

ऋग्वेद » मण्डल:1» सूक्त:47» मन्त्र:6 | अष्टक:1» अध्याय:4» वर्ग:2» मन्त्र:1 | मण्डल:1» अनुवाक:9» मन्त्र:6


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स्वामी दयानन्द सरस्वती

फिर वे कैसे हैं, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।

पदार्थान्वयभाषाः - हे (दस्रा) शत्रुओं के नाश करनेवाले (वसु) विद्यादिधन समूह को (बिभ्रता) धारण करते हुए (अश्विना) वायु और बिजुली के समान पूर्ण ऐश्वर्य युक्त आप ! जैसे (सुदासे) उत्तम सेवक युक्त (रथे) विमानादि यान में (समुद्रात्) सागर वा सूर्य से (उत) और (दिवः) प्रकाशयुक्त आकाश से पार (पृक्षः) सुख प्राप्ति का निमित्त (पुरुस्पृहम्) जो बहुत का इच्छित हो उस (रयिम्) राज्यलक्ष्मी को धारण करें वैसे (अस्मे) हमारे लिये (परिधत्तम्) धारण कीजिये ॥६॥
भावार्थभाषाः - राज पुरुषों को योग्य है कि सेना और प्रजा के अर्थ नाना प्रकार का धन और समुद्रादि के पार जाने के लिये विमान आदि यान रचकर सब प्रकार सुख की उन्नति करें ॥६॥
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हरिशरण सिद्धान्तालंकार

प्रसाद व प्रकाश

पदार्थान्वयभाषाः - १. हे (अश्विना) = प्राणापानो ! (दस्रा) = आप दोनों सब बुराइयों का विनाश करनेवाले हो । (रथे) = रथ में वस (बिभ्रता) = निवास के लिए आवश्यक धनों को धारण करते हुए आप (सुदासे) = उत्तम तथा गतिशील पुरुष में (पृक्षः) = प्रभु - सम्पर्क के कारणभूत अन्न को (वहतम्) = प्राप्त कराइए । सात्विक अन्न से बुद्धि सात्त्विक होती है और सात्त्विक बुद्धि से प्रभु का दर्शन होता है एवं यह सात्त्विक अन्न 'पृक्षः' [सम्पर्क का कारणभूत] कहलाता है । २. हे प्राणापानो ! आप (समुद्रात्) = सदा आनन्द से युक्त हृदय से (उत वा) = तथा (दिवस्परि) = मस्तिष्करूप द्युलोक से (पुरुस्पृहम्) = पालन व पूरण करनेवाले तथा स्पृहणीय (रयिम्) = धन को (अस्मे) = हमारे लिए (धत्तम्) = धारण कीजिए । हृदय का धन 'प्रसाद' व 'नैर्मल्य' है तथा मस्तिष्क का धन 'ज्ञान' व 'प्रकाश' है । प्राणायाम की साधना से यह मनः प्रसाद तथा मस्तिष्क का प्रकाश - दोनों ही प्राप्त होते हैं । ३. यदि प्राणसाधना के साथ सात्त्विक अन्न का सेवन जुड़ जाता है तो हमारा हृदय निर्मल होकर प्रसादयुक्त हो जाता है और मस्तिष्क ज्ञान की ज्योति से चमक उठता है ।
भावार्थभाषाः - भावार्थ - हम प्राणसाधना में चलें, सात्त्विक अन्न का सेवन करें, इससे हमारे हृदय प्रसन्न होंगे और मस्तिष्क चमक उठेंगे ।
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स्वामी दयानन्द सरस्वती

(सुदासे) सुष्ठु शोभना दासा यस्य तस्मिन् (दस्रा) शत्रूणामुपक्षेतारौ (वसु) विद्यादिधनसमूहम् (बिभ्रता) धरन्तौ (रथे) विमानादियाने (पृक्षः) सुखसंपर्कनिमित्तं विज्ञानम्। अत्र पृचीधातोः बाहुलकाद् औणादिकोऽसुन्प्रत्ययस्तस्य सुडागमश्च। (वहतम्) प्रापयतम् (अश्विना) वायुविद्युदादिरिव व्याप्तैश्वर्य्यौ (रयिम्) राजश्रियम् (समुद्रात्) सागरादन्तरिक्षाद्वा (उत) अपि (वा) पक्षान्तरे (दिवः) द्योतनात्मकात्सूर्यात् (परि) सर्वतः (अस्मे) अस्मभ्यम् (धत्तम्) (पुरुस्पृहम्) यत्सत्पुरुषैर्बहुभिः स्पृह्यत ईप्स्यते तत् ॥६॥

अन्वय:

पुनस्तौ कीदृशावित्युपदिश्यते।

पदार्थान्वयभाषाः - हे दस्रा वसु बिभ्रताऽश्विनेव ! युवां सुदासे रथे समुद्रादुत दिवः पारेऽस्मे पृक्षो वहतं पुरुस्पृहं रयिं च परिधत्तम् ॥६॥
भावार्थभाषाः - सभेशादिभिः राजपुरुषैः सेनाप्रजार्थं विविधं धनं समुद्रादिपाराऽवारगमनाय विमानादियानानि च संपाद्य सुखोन्नतिः कार्य्येति ॥६॥
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डॉ. तुलसी राम

पदार्थान्वयभाषाः - Ashvins, harbingers of light and prosperity, destroyers of enemies, who ride the well-piloted chariot and bring wealth and abundance for the man of generosity, come bearing universally desired honour and excellence of wealth from the sea and sky and also from the heavens.
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आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड

The same subject is continued.

अन्वय:

O President of the Assembly and Commander of the Army who are full of wealth, destroyers of your enemies, possessing wealth of various kinds, come to us sitting in the Vehicle like the aero plane which has in it many good servants or workers bringing knowledge which gives happiness, pertaining to the atmosphere or the brilliant sun and wealth desired by many whether from the firmament or the sky beyond.

पदार्थान्वयभाषाः - (वृक्ष:) सुखसम्पर्कनिमित्तं विज्ञानम् (अत्र पृची धातोर्बाहुलकादौणादिकोऽसुन्प्रत्ययः तस्य सुडागमश्च) = Knowledge which causes happiness.
भावार्थभाषाः - The Officers of the State like the President of the Assembly and others should obtain much wealth for the welfare of the army and the people should manufacture many vehicles like the aero plane to take wealth away to distant places beyond the seas for business etc. and should make all happy.
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माता सविता जोशी

(यह अनुवाद स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के आधार पर किया गया है।)
भावार्थभाषाः - राजपुरुषांनी सेना व प्रजेसाठी नाना प्रकारचे धन व समुद्र पार करण्यासाठी विमान इत्यादी याने तयार करून सर्व प्रकारे सुख वाढवावे. ॥ ६ ॥