समि॑द्धो अ॒द्य रा॑जसि दे॒वो दे॒वैः स॑हस्रजित्। दू॒तो ह॒व्या क॒विर्व॑ह ॥
samiddho adya rājasi devo devaiḥ sahasrajit | dūto havyā kavir vaha ||
सम्ऽइ॑द्धः। अ॒द्य। रा॒ज॒सि॒। दे॒वः। दे॒वैः। स॒ह॒स्र॒ऽजि॒त्। दू॒तः। ह॒व्या। क॒विः। व॒ह॒ ॥ १.१८८.१
स्वामी दयानन्द सरस्वती
अब ग्यारह ऋचावाले एकसौ अट्ठासी सूक्त का आरम्भ है। उसके प्रथम मन्त्र में अग्नि के दृष्टान्त से राजगुणों का उपदेश करते हैं।
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
हव्य-प्रापण
स्वामी दयानन्द सरस्वती
अथाऽग्निदृष्टान्तेन राजगुणानाह ।
हे सहस्रजित् राजन् समिद्धइव देवैः सह देवः सहस्रजिद्दूतः कविस्त्वमद्य राजसि स त्वं हव्या वह ॥ १ ॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
The attributes of a ruler.
O ruler! you are conqueror of thousands and are brilliant like the fire. You in order to seek victory shine today along with other brave warriors. They are equally desirous of conquering their foes. You frighten the hearts of the wicked and unjust adversaries and are yourself wise. Convey to us acceptable articles.
माता सविता जोशी
(यह अनुवाद स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के आधार पर किया गया है।)या सूक्तात अग्नीच्या दृष्टान्ताने राजा, अध्यापक, उपदेशक, स्त्री-पुरुष, ईश्वर व दाता यांच्या गुणांचे वर्णन असल्यामुळे याच्या अर्थाची मागच्या सूक्तार्थाबरोबर संगती जाणली पाहिजे.
