तयो॒रिदव॑सा व॒यं स॒नेम॒ नि च॑ धीमहि। स्यादु॒त प्र॒रेच॑नम्॥
tayor id avasā vayaṁ sanema ni ca dhīmahi | syād uta prarecanam ||
तयोः॑। इत्। अव॑सा। व॒यम्। स॒नेम॑। नि। च॒। धी॒म॒हि॒। स्यात्। उ॒त। प्र॒ऽरेच॑नम्॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
फिर उन दोनों से मनुष्यों को क्या-क्या करना चाहिये, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है-
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
धन की प्राप्ति - वर्धन - दान
स्वामी दयानन्द सरस्वती
पुनस्ताभ्यां मनुष्यैः किं कर्त्तव्यमित्युपदिश्यते।
वयं ययोर्गुणानामवसैव यानि सुखानि धनानि च सनेम तयोः सकाशात्तानि पुष्कलानि धनानि च निधीमहि तैः कोशान् प्रपूरयेम येभ्योऽस्माकं प्ररेचनमुत स्यात्॥६॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
What other things should be done with them (Indra and Varuna) is taught in the seventh Mantra.
Through the knowledge of Indra and Varuna as explained above, may we gain great store of wealth and enjoy much happiness, and heap up that wealth, enough still to spare be ours for proper utilization.
