नक्तो॒षासा॑ सु॒पेश॑सा॒ऽस्मिन्य॒ज्ञ उप॑ ह्वये। इ॒दं नो॑ ब॒र्हिरा॒सदे॑॥
naktoṣāsā supeśasāsmin yajña upa hvaye | idaṁ no barhir āsade ||
नक्तो॒षासा॑। सु॒ऽपेश॑सा। अ॒स्मिन्। य॒ज्ञे। उप॑। ह्व॒ये॒। इ॒दम्। नः॒। ब॒र्हिः। आ॒ऽसदे॑॥
स्वामी दयानन्द सरस्वती
उक्त कर्म से दिनरात सुख होता है, सो अगले मन्त्र में प्रकाशित किया है-
हरिशरण सिद्धान्तालंकार
नक्तोषासा [रात - दिन]
स्वामी दयानन्द सरस्वती
तत्रैतेनाहोरात्रे सुखं भवतीत्युपदिश्यते।
अहमस्मिन् गृहे यज्ञे सुपेशसौ नक्तोषसावुपह्वय उपस्पर्द्धे, यतो नोऽस्माकमिदं बर्हिरासदे भवेत्॥७॥
डॉ. तुलसी राम
आचार्य धर्मदेव विद्या मार्तण्ड
I invoke the lovely night and dawn in my house and the solemn Yajna (non-violent sacrifice) so that this my house or Yajna may be the source of happiness to all.
